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एनजीटी खुद देखेगा मैली गंगा के प्रदूषण का स्तर

Wed, 03 May 2017 03:11 AM IST
amarujala.com, Presented By: मोहित
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- फोटो : अमर उजाला
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गंगा सफाई पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने चौंकाने वाला फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर हरिद्वार सीमा तक गंगा में प्रदूषण की हकीकत जानने के लिए अब खुद एनजीटी की प्रधान पीठ मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी। प्रधान पीठ ने यह फैसला जांच समितियों और संबंधित प्राधिकरणों के जवाबों से असंतुष्ट रहने की वजह से यह अप्रत्याशित फैसला लिया है। पीठ ने कहा कि उसका मकसद गंगा में प्रदूषण की स्थिति पर प्राथमिक यानी फर्स्ट हैंड रिपोर्ट हासिल करना है।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ याची एमसी मेहता की याचिका पर लगातार सुनवाई कर रही है। पीठ ने पहले प्राधिकरणों को उन्नाव में गंगा डूब क्षेत्र से भू-जल का दोहन करने वाली औद्योगिक इकाइयों को नोटिस जारी करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और जल्द ही यह रुकना चाहिए। इसके बाद पीठ ने कहा कि वह खुद ही गंगा के सबसे प्रदूषित (हरिद्वार से कानपुर) क्षेत्र की जांच करेगी।    
  
जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा कि गंगा सफाई मामले पर रोजाना होने वाली सुनवाई के बावजूद कोई मजबूत आंकड़ा सामने नहीं आ रहा है। गंगा में डाले जाने वाले कचरे की मात्रा और उसकी गुणवत्ता के बारे में कुछ ठोस जानकारी नहीं मिल रही है। मामले के जल्दी निपटारे के लिए यह जरूरी है कि इसमें मौजूद विवादों और अंतर्विरोधों को खत्म किया जाए। यह न्याय के लिए भी जरूरी है कि सबसे प्रदूषित गंगा क्षेत्रों की स्वयं जांच की जाए।
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कानपुर से लेकर हरिद्वार तक जांच और निरीक्षण के लिए सभी तैयारियां

गंगा प्रदूषण की ये हालत
पीठ ने कहा कि इसलिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश जल निगम कानपुर से लेकर हरिद्वार तक जांच और निरीक्षण के लिए सभी तैयारियां करें।     

पीठ ने कहा कि प्राधिकरणों से एनजीटी रजिस्ट्रार जनरल संवाद स्थापित कर जांच और निरीक्षण के लिए समय और तारीख तय करेंगे। जांच और निरीक्षण के लिए जस्टिस स्वतंत्र कुमार के साथ जस्टिस जावद रहीम, जस्टिस आरएस राठौर और विशेषज्ञ सदस्यों में बीएस साजवान, अजय ए देशपांडे और नागिन नंदा साथ होंगे।

एनजीटी ने विभिन्न प्राधिकरणों से गंगा के डूब क्षेत्र से भू-जल दोहन, पर्यावरणीय प्रवाह, गंगा से जुड़ने वाले नालों, गंगा में निकासी होने वाले औद्योगिक प्रवाह और सीवेज की जानकारी मांगी थी। हालांकि कोई भी ठोस या संतुष्ट करने वाले आंकड़ा पीठ के पास नहीं पहुंचे। इसलिए प्रधान पीठ ने खुद निरीक्षण फैसला लिया है।     
 
एनजीटी गंगा सफाई मामले पर चार भागों में सुनवाई कर रही है। गोमुख से हरिद्वार तक गंगा क्षेत्र के लिए फैसला सुनाने के बाद अब हरिद्वार से उन्नाव के लिए सुनवाई कर रही है। इसके बाद उन्नाव से उत्तर प्रदेश की सीमा व फिर झारखंड से बंगाल की खाड़ी तक गंगा क्षेत्र के लिए सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी एनजीटी को गंगा मामले पर सुनवाई करने के लिए पूरी छूट दी है। 
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