नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बिना अनुमति के रोजाना लाखों लीटर भूजल का दोहन करने वाले स्लॉटर हाउस और बफैलो मीट एक्सपोर्ट यूनिटों पर निगाहें टेढ़ी कर दी हैं। एनजीटी ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्लॉटर हाउसों और मीट एक्सपोर्ट यूनिटों का ब्यौरा तलब किया है।
ब्योरे में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी से भूजल दोहन की अनुमति की एनओसी और दूसरे प्रमाण पत्र मांगे गये हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है। इस केस में मीट और चर्बी की दुर्गंध और जल प्रदूषण की बेहद गंभीर समस्या भी शामिल है।
इस प्रकरण में जिलाधिकारी डा. बलकार सिंह के निर्देश पर सीएमओ डा.ए के राय, सीवीओ डा.देवेंद्र राजपूत, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरएम प्रमोद कुमार मिश्रा सहित पांच अधिकारियों की टीम गठित की गई है, जो स्लॉटर हाउसों में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और भूजल दोहन के सभी क्रियाकलापों की निगरानी कर रही है।