हम सब नोटबंदी की घोषणा को पीएम मोदी का कालेधन पर अबतक का सटीक प्रहार मान रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं पीएम मोदी के पास ये आइडिया आया कहां से था? जी हां हम बताते हैं आपको पीएम साहब को ये आइडिया कहां से आया।
दरअसल ये आइडिया पुणे निवासी अनिल बोकिल और उनके थिंक टैंक अर्थक्रांति प्रतिष्ठान का है। पीएम मोदी से मिलने के लिए बोकिल को सिर्फ नौ मिनट का समय दिया गया था। मुलाकात के दौरान जब मोदी ने बोकिल को सुना तो वह उन्हें सुनते की रह गए और नौ मिनट-दो घंटे में कब बदल गए पता ही नहीं चला।
लेकिन नोटबंदी का आइडिया देने वाले बोकिल सरकार से नाराज हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने उनका आइडिया पूरा-पूरा मानने के बजाय अपनी पसंद को महत्व दिया।
सरकार ने पांच में से मानें दो ही सुझाव
Anil Bokil
उन्होंने मुंबई मिरर से कहा कि मंगलवार को वह प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जा रहे थे। लेकिन मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से कोई सूचना नहीं आयी। अनिल बोकिल का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने एक व्यापक प्रस्ताव रखा था जिसके पांच आयाम थे। हालांकि, सरकार ने इनमें सिर्फ दो को ही चुना।
यह अचानक उठाया गया कदम था, ना कि बहुत सोचा-समझा। इस कदम का ना ही स्वागत किया जा सकता है और ना ही इसे खारिज कर सकते हैं। हम इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं। हमने सरकार को जो रोडमैप दिए थे, उससे ऐसी परेशानियां नहीं होतीं। अगर ये सभी सुझाव एकसाथ मान लिए गए होते, तो इससे ना केवल आम आदमी को फायदा होता बल्कि पूरी व्यवस्था ही बदल गई होती।
बोकिल ने कहा कि हम इस प्रस्ताव पर 16 सालों से काम कर रहे हैं जब अर्थक्रांति साल 2000 में स्थापित हुई। बोकिल ने बताया कि 16 सदस्यों की एक तकनीकी समिति ने यह प्रस्ताव दिया जिसने गारंटी दी कि इससे एक भी व्यक्ति प्रभावित नहीं होगा। इस कदम का सिर्फ और सिर्फ कालाधन, आतंकवाद और फिरौती से जुड़े अपराधों पर प्रहार होता। इससे प्रॉपर्टी की कीमतें कम होतीं और जीडीपी का विस्तार होता। सरकार ने 2,000 रुपये के नोट ला दिए जिसे हम वापस लेने का प्रस्ताव रख रहे हैं।