मणिपुर के चुराचंद्रपुर जिले के कांगवेई गांव के रहने वाले 12 साल के आइजेक पॉललुंग मुआन वाईफेई ने साबित कर दिखाया है कि उनके नाम में न्यूटन का नाम सही जोड़ा गया है। मेधा के धनी आइजेक इस कच्ची उम्र में दसवीं कक्षा का इम्तहान देने जा रहे हैं। गौरतलब है कि महान वैज्ञानिक न्यूटन का पूरा नाम आइजेक न्यूटन था।
अभी आठवीं कक्षा में पढ़ रहा आइजेक अपने नाम पर सोलह आने खरा उतर रहा है और वह इंफाल में सबसे कम उम्र में दसवीं की परीक्षा देने वाला छात्र बन गया है। इसके लिए बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन ने आइजेक को परीक्षा में बैठने के विशेष अनुमति दी है। बोर्ड ने उसे स्पेशल केस मानते हुए यह कदम उठाया है पर इसके लिए पहले आइजेक का मनोवैज्ञानिक टेस्ट किया गया।
अपने घर के सबसे बड़े बच्चे आइजेक ने कहा कि वह बोर्ड के इस फैसले से बहुत खुश है और वह सर आइजेक न्यूटन का प्रशंसक है क्योंकि उसे लगता है कि वह उनके जैसा है और हमनाम है। बोर्ड के नियम के अनुसार एक अप्रैल को 15 साल की आयु पूरी करने वाले छात्र ही कक्षा दस बोर्ड की परीक्षा में बैठ सकता है। पर अब आइजेक असम हाईस्कूल लीविंग सर्टिफिकेट की दसवीं की परीक्षा दे सकेगा।
साइको टेस्ट में किया कमाल
बोर्ड ने उसे अनुमति देने का फैसला तो किया पर इसके लिए उसने मनोवैज्ञानिक परीक्षण की शर्त लगा दी। पूर्वोत्तर के इस न्यूटन ने इस टेस्ट में साबित किया कि उसकी मानसिक आयु 17 साल पांच महीने है। यानी जो बच्चा साढ़े 17 साल में लिख पढ़ समझ सकता है वह आइजेक अभी ही समझ पा रहा है। यह परीक्षण रिम्स इंफाल के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग में किया गया।