घबराहट और डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक अहम दवा अब मरीजों को सस्ते दाम पर मिलेगी। सरकार ने एस्सिटालोप्राम 10 मिलीग्राम+ क्लोनाजेपाम 0.5 मिलीग्राम टैबलेट की अधिकतम कीमत 15.69 रुपये प्रति टैबलेट (जीएसटी अलग) निर्धारित कर दी है।
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अभी यही दवा अलग-अलग कंपनियां 16 से 17.25 रुपये प्रति टैबलेट बेच रही हैं। नई सीमा लागू होने के बाद वे इससे ज्यादा कीमत नहीं वसूल सकेंगी। यह दवा डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर, पैनिक अटैक, अत्यधिक तनाव और बेचैनी जैसी समस्याओं के इलाज में डॉक्टर की सलाह पर दी जाती है। इसमें एस्किटालोप्राम मूड सुधारने और डिप्रेशन कम करने में मदद करती है, जबकि क्लोनाजेपाम घबराहट कम करती है।
होम्योपैथिक को झोलाछाप कहने पर एनसीएच ने भेजा नोटिस, डॉक्टर ने लगाया किस पर आरोप?
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) ने होम्योपैथी को ढोंगी चिकित्सा पद्धति कहने पर केरल में एर्नाकुलम के डॉक्टर डॉ साइरिएक एबी फिलिप्स को कानूनी नोटिस भेजा है। इसके जवाब में उन्होंने कहा है कि वह न तो अपने पोस्ट हटाएंगे, न माफी मांगेंगे और न ही होम्योपैथी की आलोचना बंद करेंगे। एनसीएच का आरोप है कि डॉक्टर फिलिप्स लंबे वक्त से सोशल मीडिया, पॉडकास्ट और अन्य मंचों पर होम्योपैथी और आयुष पद्धतियों के खिलाफ भ्रामक, अपमानजनक और मानहानिकारक बयानबाजी कर रहे हैं। नोटिस में दावा किया गया है कि डॉक्टर ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में होम्योपैथी को आधुनिक झोलाछाप टोना-टोटका और ढोंगी चिकित्सा पद्धति बताया है। इससे होम्योपैथी चिकित्सकों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के साथ ही आम लोगों का भरोसे पर भी असर पड़ा है। डॉ फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर एनसीएच के दिए नोटिस के जवाब में कहा कि सरकार उन्हें डराने और चुप कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पोस्ट की गई पूरी सामग्री वैज्ञानिक शोध और साक्ष्य आधारित है।
अब दिव्यांगों के लिए सांकेतिक भाषा में बनेगा दवा सुरक्षा मॉड्यूल
दिव्यांगों तक दवाओं की सही जानकारी पहुंचाने और हर्बल दवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र ने अहम कदम उठाया है। इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) ने दो प्रमुख संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। पहला समझौता लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास वििव के साथ हुआ है। इसके तहत सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जाएगा, ताकि मूक-बधिर लोग दवाओं के बारे में समझ सकें। दूसरा समझौता केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान के साथ हुआ है।
ट्रेन में तत्काल बुकिंग के लिए आधार सही, पैन पर विचार हो : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि तत्काल ट्रेन टिकटिंग प्रणाली के लिए जरूरी आधार प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और जस्टिस वीएम श्याम कुमार की खंडपीठ रेल मंत्रालय की शुरू की गई तत्काल टिकटिंग प्रणाली में आधार आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
कोर्ट ने पाया, यह प्रमाणीकरण वैकल्पिक है और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन टिकट खरीद के लिए आधार जानकारी साझा करने की कोई मजबूरी नहीं है। कोर्ट ने जिक्र किया कि तत्काल टिकटों के लिए प्रमाणीकरण की आवश्यकता कथित धोखाधड़ी, हेरफेर और थोक (बल्क) बुकिंग के अनुभवों के आधार पर उचित है, क्योंकि इसने वास्तविक उपयोगकर्ताओं को टिकटिंग प्रणाली तक पहुंच से वंचित कर दिया था। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे सत्यापन के लिए वैकल्पिक रूप से पैन कार्ड का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि पैन विवरण से जुड़ा ओटीपी जनरेशन भी होता है और यह आधार सत्यापन के समान ही परिणाम देगा।
मणिपुर के मोइरांग पेट्रोल पंप ब्लास्ट मामले में उग्रवादी गिरफ्तार
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में पुलिस ने मोइरांग के एक पेट्रोल पंप पर हुए बम धमाके के मामले में एक उग्रवादी को गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रतिबंधित संगठन कांगलेई यावोल कन्ना लुप (KYKL) का सक्रिय सदस्य है। पुलिस ने गुरुवार को बिष्णुपुर के तेरा उराक चेकपोस्ट से 39 वर्षीय मयांगलंबम तोम्बा सिंह को पकड़ा। वह चुराचांदपुर जिले के बीजांग खुनौ का निवासी है और फिलहाल फुबाला राहत शिविर में रह रहा था। पुलिस ने उसके पास से एक 9 मिमी पिस्तौल, मैगजीन और 11 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। तोम्बा सिंह इस साल की शुरुआत में मोइरांग के पेट्रोल पंप धमाके में शामिल था, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ था। एक अलग अभियान में, सुरक्षा बलों ने चुराचांदपुर के मोलनोम से प्रतिबंधित यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (UKNA) के संदिग्ध फाइनेंस हेड एस पालल कुकी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पकड़ा गया उग्रवादी गोलीबारी और जबरन वसूली के कई मामलों में शामिल रहा है।
कर्नाटक में फर्जी पीएचडी प्रमाणपत्र देने वाले 249 अतिथि प्रवक्ताओं पर दर्ज होंगे आपराधिक मामले
कर्नाटक कॉलेज शिक्षा विभाग ने सरकारी प्रथम श्रेणी कॉलेजों में फर्जी या अवैध पीएचडी प्रमाणपत्र जमा करके नियुक्ति पाने वाले 249 अतिथि प्रवक्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने के आदेश दिए हैं। विभाग ने इन सभी 249 उम्मीदवारों को ब्लैकलिस्ट करते हुए भविष्य की सभी भर्तियों से हमेशा के लिए बाहर कर दिया है। सत्र 2025-26 के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग के जरिए लगभग 10,000 अतिथि प्रवक्ताओं की भर्ती की गई थी। इस दौरान कॉलेज प्राचार्यों को संबंधित विश्वविद्यालयों से चयनित उम्मीदवारों के स्नातकोत्तर, नेट (NET), के-सेट (K-SET), पीएचडी, एमफिल और कल्याण कर्नाटक प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता रिपोर्ट हासिल करने का निर्देश दिया गया था। विभागीय जांच समिति और ईएमआईएस (EMIS) पोर्टल के सत्यापन में 249 उम्मीदवारों के पीएचडी प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। सरकार को गुमराह करने पर इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत स्थानीय थानों में प्राथमिकी दर्ज करने और एक हफ्ते में रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया गया है।