सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कल यानी गुरुवार को फिर होगी। सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने पक्षों से दो बिंदुओं पर विचार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके सामने दो सवाल हैं, पहला- क्या उसे मामले की सुनवाई करनी चाहिए या इसे हाईकोर्ट को सौंप देना चाहिए और दूसरा- वकील किन बिंदुओं पर बहस करना चाहते हैं।
'जब वे दिल्ली उच्च न्यायालय में थे, तो हमें बताया गया कि यह भूमि वक्फ भूमि है'
सीजेआई खन्ना ने कहा कि जब वे दिल्ली उच्च न्यायालय में थे, तो हमें बताया गया कि यह भूमि वक्फ भूमि है। हमें गलत मत समझिए। हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी वक्फ उपयोगकर्ता द्वारा गलत तरीके से पंजीकृत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक उच्च न्यायालय को भी मामले की सुनवाई करने का निर्देश दे सकता है और इस तरह से उसे उच्च न्यायालय के फैसले का लाभ मिलेगा।
केंद्र का तर्क
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक संयुक्त संसदीय समिति थी, जिसने 38 बैठकें कीं। इसने कई क्षेत्रों और शहरों का दौरा किया, परामर्श किया और लाखों सुझावों की जांच की। फिर यह दोनों सदनों में गया और फिर कानून पारित किया गया।
रिजिजू ने क्या कहा?
सुनवाई से पहले मंगलवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने नए वक्फ कानून को कानूनी चुनौती का जिक्र करते हुए कहा, मुझे विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट विधायी मामले में दखल नहीं देगा। रिजिजू ने कहा, संविधान में शक्तियों का विभाजन अच्छी तरह से परिभाषित है। हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। अगर कल सरकार न्यायपालिका में हस्तक्षेप करती है, तो अच्छा नहीं होगा।
कितनी याचिकाएं?
गौरतलब है कि एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी, आप नेता अमानतुल्ला खान, धर्म गुरु मौलाना अरशद मदनी, राजद नेता मनोज झा एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड व जमीयत-ए-उलमा-ए-हिंद समेत कई मुस्लिम संगठनों ने शीर्ष कोर्ट में दो दर्जन याचिकाएं दायर की हैं। कोर्ट में 70 से ज्यादा याचिकाओं के जरिए वक्फ संशोधन कानून को चुनौती दी गई है।