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टीबी के इलाज में नया प्रयोग: नाक से दी जाएगी दवा, पीसीओएस और नसों की बीमारी की दवाओं का भी ट्रायल मंजूर

Sat, 26 Sep 2026 06:36 PM IST
राकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

सीडीएससीओ की विशेषज्ञ समिति ने टीबी, एएलएस और पीसीओएस समेत कई बीमारियों की नई दवाओं के ह्यूमन ट्रायल को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। सीएसआईआर-सीडीआरआई की रिफाब्यूटिन और आइसोनियाजिड वाली दवा को सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचाने की तैयारी है। एएलएस की दवा उसनॉफ्लास्ट के फेज-3 और पीसीओएस की यूट्रेग्लूटाइड के फेज-2 ट्रायल को भी मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। भारी धातु विषाक्तता की दवाओं पर भी जांच जारी है।
 
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टीबी की बीमारी का इलाज - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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टीबी के इलाज में एक नया विकल्प तैयार किया जा रहा है। सीएसआईआर-सीडीआरआई ने रिफाब्यूटिन और आइसोनियाजिड को मिलाकर ऐसी दवा विकसित की है, जिसे सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचाया जाएगा। यानी रोज गोली खाने के बजाय दवा को सीधे सांस के रास्ते देने की कोशिश है। यह खास तौर पर टीबी के इलाज में एक नया तरीका हो सकता है। इस दवा के ह्यूमन ट्रायल की तैयारी शुरू हो गई है। जानवरों पर इसका परीक्षण हो चुका है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने जानवरों पर दवा की सुरक्षा से जुड़े और आंकड़े मांगे हैं। इसके अलावा यह भी कहा है कि पहले चरण में स्वस्थ लोगों पर दवा को आजमाया जाए और सुरक्षा पर नजर रखने के लिए अलग निगरानी बोर्ड बनाया जाए।
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नसों और महिलाओं से जुड़ी बीमारी की दवा के ट्रायल को भी मंजूरी
नसों और मांसपेशियों को धीरे-धीरे कमजोर करने वाली बीमारी एएलएस के इलाज के लिए नई दवा का ह्यूमन ट्रायल अब अगले चरण में पहुंच गया है। विशेषज्ञ समिति ने उसनॉफ्लास्ट के फेज-3 ट्रायल को मंजूरी देने की सिफारिश की है। यानी अब इस दवा को ज्यादा मरीजों पर आजमाकर देखा जाएगा कि यह बीमारी में कितनी असरदार और सुरक्षित है। दोनों समूहों के मरीजों को एक जैसी मानक दवा देने की भी शर्त रखी गई है।

इसी तरह महिलाओं में होने वाली पीसीओएस समस्या से जुड़े इलाज के लिए यूट्रेग्लूटाइड दवा का फेज-2 ट्रायल भी आगे बढ़ाया गया है। विशेषज्ञ समिति ने खास तौर पर कहा है कि अध्ययन में शामिल किशोरियों की जांच तय मानकों के अनुसार हो। थायरॉयड, प्रोलैक्टिन और दूसरे हार्मोन की जांच के साथ अल्ट्रासाउंड से अंडाशय की स्थिति भी देखी जाएगी। ट्रायल में शामिल मरीजों को मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए व्यायाम और पर्याप्त प्रोटीन वाला भोजन देने की शर्त भी रखी गई है।
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भारी धातु के जहर के इलाज की नई दवा भी जांच के दौर में
मोइएडीएमएसए नाम की इंजेक्शन वाली दवा के फेज-1 ह्यूमन ट्रायल को अभी सीधे मंजूरी नहीं मिली। समिति ने जानवरों पर दवा के असर और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त आंकड़े मांगे हैं। प्रस्तावित ट्रायल केंद्र को भी उपयुक्त नहीं माना गया है। ये आर्सेनिक जैसी जहरीली धातुओं के असर को कम करने की दवा है। वहीं 13-मेटा एचसीएल नाम की इंजेक्शन दवा के फेज-1 ट्रायल को आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसमें सुरक्षा निगरानी के लिए दूसरे संस्थान के स्वतंत्र हृदय रोग विशेषज्ञ को शामिल करने की शर्त रखी गई है।
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