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अध्ययन: दुनिया में जंगल में आग लगने की घटनाएं 54% बढ़ीं, प्रभावित लोग 40 फीसदी; दावा- रात में बढ़ी ज्वलनशीलता

Wed, 27 Aug 2025 03:35 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली

सार

साइंस जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन से पता चलता है कि जंगल की आग के संपर्क में आने वाले मनुष्यों की संख्या में लगभग पूरी वृद्धि (85 प्रतिशत) अफ्रीका में हुई। अमेरिका और एशिया में वृद्धि उल्लेखनीय रही। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय- जल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संस्थान के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में हुए शोध में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन ने भीषण आग की घटनाओं को भड़काने वाले मौसम के दिनों की संख्या बढ़ा दी है।
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जंगल में लगी आग (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले दो दशकों में जंगल की आग के संपर्क में आने वाले इंसानों की संख्या 40 प्रतिशत बढ़ी है। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं 54 प्रतिशत बढ़ी हैं। 2002 से 2021 तक जनसंख्या गतिशीलता के कारण 11.13 करोड़ लोग जंगल की आग के संपर्क में आए। यह बीते दो दशकों में जंगल की आग के संपर्क में आई दुनिया की आबादी का 25.3 प्रतिशत है। साइंस जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन से पता चलता है कि जंगल की आग के संपर्क में आने वाले मनुष्यों की संख्या में लगभग पूरी वृद्धि (85 प्रतिशत) अफ्रीका में हुई। अमेरिका और एशिया में वृद्धि उल्लेखनीय रही। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय- जल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संस्थान के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में हुए शोध में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन ने भीषण आग की घटनाओं को भड़काने वाले मौसम के दिनों की संख्या बढ़ा दी है। उसके परिणामस्वरूप 1979 से 2022 तक वैश्विक स्तर पर भीषण आग के मौसम में 54 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। आग लगने का मौसम लंबा हुआ और रात में ज्वलनशीलता बढ़ी है।

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जली हुई भूमि 26 प्रतिशत तक सिकुड़ रही
संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय-जल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संस्थान में लीड-वाटर, क्लाइमेट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क के सह लेखक अमीर आगा कौचक ने कहा कि आग के प्रति मानवीय जोखिम बढ़ रहा। हालांकि, जली हुई भूमि 26 प्रतिशत तक सिकुड़ रही। अध्ययन में 2002 और 2021 के बीच वैश्विक अग्नि एटलस (जीएफए) से 18.6 मिलियन अग्नि रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।
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मौसमी या क्षेत्रीय विसंगतियां नहीं रह गईं
संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय-जल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक कावेह मदनी ने कहा कि जंगल की आग अब मौसमी या क्षेत्रीय विसंगतियां नहीं रह गईं। यह वैश्विक संकट बन गई है, जो बढ़ती गर्मी, बिगड़ते सूखे और भूमि उपयोग में भारी बदलावों के कारण और गंभीर हो गई है। शोधकर्ताओं ने कहा, जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाने के वैश्विक प्रयासों के साथ जंगल की आग के जोखिमों से निपटने के उपायों को मिलाकर समाज संवेदनशील आबादी की बेहतर सुरक्षा कर सकते हैं। जंगल की आग से होने वाली बढ़ती मानवीय क्षति को कम कर सकते हैं।

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