फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Explainer: तय सीमा से ज्यादा सिम खरीदने-रखने वालों पर आज से सख्ती, कैसे और क्या हो सकती है कार्रवाई?

Mon, 24 Aug 2026 12:52 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

नौ से ज्यादा सिम रखने वालों पर सरकार की सख्ती शुरू। टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए नए नियम लागू। जानें कैसे चेक करें अपने नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और क्या है पूरा नियम।
विज्ञापन
अब बदलेगी सिम कार्ड जारी करने और सक्रिय रखने की व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सरकार की ओर से मोबाइल सिम कार्ड को लेकर नई सख्त नीति आज (24 अगस्त 2026) से लागू हो गई। इस नीति के जरिए अब टेलीकॉम ऑपरेटर्स से सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल पर रोक सुनिश्चित कराई जाएगी। ऐसा नहीं है कि सरकार की तरफ से सिम कार्ड को लेकर पहले से कोई नीति नहीं है, लेकिन अब जो नियम लागू हुए हैं, उनसे सरकार की ओर से सिम कार्ड के निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। 
विज्ञापन


आइये सवाल-जवाब में जानते हैं कि आज से सिम कार्ड के नियमों में क्या बड़े बदलाव होने वाले हैं...


सवाल-1: क्या सरकार सिम की तय सीमा बदलने वाली है?

नहीं, ग्राहकों के लिए सिम कार्ड रखने की मूल सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भारत के अधिकतर हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम नौ मोबाइल कनेक्शन (सिम) रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा छह सिम कार्ड की है। यह सीमा सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों और सर्किलों को मिलाकर लागू होती है।

सवाल-2: तो सिम कार्ड खरीद पर आज से क्या नियम लागू?

सिम की सीमा को लेकर नियम तो पहले से हैं, हालांकि इनका कड़ाई से अब तक पालन नहीं होता। सरकार 24 अगस्त से एक ग्राहक के पास मोबाइल कनेक्शनों की सीमा को सख्ती से लागू करने जा रही है। आज से टेलीकॉम ऑपरेटरों, जैसे- जियो, एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, बीएसएनएल के लिए नया सिम जारी करने से पहले यह जांचना अनिवार्य कर दिया गया है कि ग्राहक के नाम पर पहले से कितने सिम पंजीकृत हैं। अगर ग्राहक पहले ही अपनी तय सीमा तक पहुंच चुका है, तो उसे नया सिम देने से मना कर दिया जाएगा।


सवाल-3: अगर ग्राहक के पास पहले से ही तय सीमा में सिम मौजूद तो?

  • सामान्य ग्राहक जिनके पास तय सीमा के अंदर सिम कार्ड हैं, उन्हें इस बदलाव से किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके सभी मोबाइल कनेक्शन सामान्य रूप से काम करते रहेंगे।
  • ऐसे ग्राहक अपनी निर्धारित सीमा (नौ या छह सिम) तक नए सिम कार्ड बिना किसी समस्या के खरीद सकते हैं। नए कनेक्शन के लिए ग्राहक को ऑपरेटर की सामान्य केवाईसी प्रक्रिया का ही पालन करना होगा।

ये भी पढ़ें: SIM Rules: अब मनमाने सिम नहीं ले पाएंगे! 24 अगस्त से लागू होंगे नए नियम, जानिए कितने नंबर रख सकते हैं आप

सवाल-4: तय सीमा से ज्यादा सिम हुए तो कौन सा सिम बंद होगा?

  • अगर किसी ग्राहक के पास सिम की संख्या अधिकतम सीमा (नौ या छह) तक पहुंच चुकी है, तो कोई भी टेलीकॉम ऑपरेटर ऐसे ग्राहक को नया सिम कार्ड जारी नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में ऑपरेटर आपको सूचित करेगा कि आप अपनी कानूनी सीमा पार कर चुके हैं।
  • अगर किसी ग्राहक के पास पहले ही तय सीमा से ज्यादा सिम हैं तो नए नियमों के लागू होने पर मौजूदा सभी नंबर अचानक काम करना बंद नहीं करेंगे। हालांकि, अतिरिक्त कनेक्शनों के खिलाफ दूरसंचार विभाग के मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
  • तय कनेक्शन की सीमा के अंतर्गत लाने के लिए टेलीकॉम विभाग उपभोक्ताओं को अपने अतिरिक्त नंबरों को सरेंडर (लौटाने), ट्रांसफर (स्थानांतरित) या डिस्कनेक्ट (बंद) करने का विकल्प देता है। सीधे तौर पर ग्राहक तय सीमा से अतिरिक्त सिम अपने पास नहीं रख पाएगा।
  • हालांकि, अगर ग्राहक अतिरिक्त नंबरों को लौटाना, ट्रांसफर करना या बंद करने का विकल्प नहीं लेता तो सरकार उन सभी सिम कार्ड्स को ब्लॉक करना शुरू कर देगी जो पहले नौ कनेक्शनों के बाद जारी किए गए थे।

भारत में सिम के लिए पहले से लागू हैं सीमाएं। - फोटो : अमर उजाला

सवाल-5: जो सिम इस्तेमाल में नहीं, उसका क्या होगा?

अगर किसी ग्राहक के पास कोई पुराना या बिना इस्तेमाल वाला सिम मौजूद है, जो अभी भी उसके दस्तावेजों पर पंजीकृत है, तो वह भी उसकी निर्धारित सीमा में गिने जाएंगे। ऐसे पुराने नंबरों को बंद किए बिना उपभोक्ता नया मोबाइल नंबर नहीं ले पाएंगे।


सवाल-6: सरकार-ऑपरेटरों के पास कैसे होगी ग्राहकों के सिम कनेक्शन की जानकारी?

सरकार और टेलीकॉम ऑपरेटरों के पास ग्राहकों के सिम कनेक्शन की सटीक जानकारी होने और उसकी निगरानी करने के लिए एक बेहद मजबूत और तकनीकी ढांचा तैयार किया गया है। 

1. सेंट्रलाइज्ड डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी)
दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने एक सुरक्षित और केंद्रीय प्रणाली डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) बनाई है। सभी टेलीकॉम ऑपरेटर अपने ग्राहकों के सक्रिय मोबाइल कनेक्शनों का डेटा इस प्लेटफॉर्म पर साझा करते हैं। इसके जरिए ऑपरेटर किसी भी ग्राहक का रिकॉर्ड क्रॉस-चेक कर सकते हैं, जिससे ग्राहक टेलीकॉम कंपनी या राज्य बदलकर इस सिम सीमा से बच नहीं सकता।

2. फोटो के जरिए ग्राहकों की पहचान 
नियमों को और सख्त बनाने के लिए 23 अगस्त से ही डीआईपी पर उन सभी ग्राहकों के चेहरे के फोटो उपलब्ध करा दिए गए हैं जो अपनी सिम सीमा (नौ या छह सिम) को पूरा कर चुके हैं। टेलीकॉम ऑपरेटरों को इन फोटोज को रोजाना डाउनलोड करना होगा और नए सिम आवेदन के सत्यापन के दौरान इनका मिलान करना होगा, ताकि फर्जी नाम पर सिम लेने की कोशिशों को रोका जा सके।

सवाल-7: सरकार कैसे लागू कर रही यह पूरी व्यवस्था?

  • 24 अगस्त से अगले कुछ दिनों तक ग्राहकों की ओर से लिए गए सिम कार्ड की जांच की यह व्यवस्था पोस्ट-फैक्टो आधार पर काम करेगी। यानी सिम चालू होने के बाद डेटा की जांच होगी।
  • अगर कोई ऑपरेटर तकनीकी बदलाव के इस दौर में गलती से तय सीमा से अधिक नया सिम सक्रिय कर देता है, तो उस सिम को तुरंत एक दिन के लिए निलंबित कर दिया जाएगा, जब तक कि अतिरिक्त सिम के इस मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता। 
  • 30 नवंबर के बाद, ऑपरेटरों को इसे रियल-टाइम प्रणाली में बदलना होगा, जिससे सिम जारी करने और एक्टिवेट करने की प्रक्रिया के दौरान ही उल्लंघन का पता चल जाएगा और अतिरिक्त सिम चालू ही नहीं हो पाएगा।

सवाल-8: सरकार क्यों लागू कर रही सिम की सीमा पर सख्ती?

  • अक्सर देखा गया है कि एक ही पहचान पर बड़ी संख्या में सक्रिय किए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल स्पैम, फिशिंग (phishing), वित्तीय धोखाधड़ी, दूसरे की पहचान का उपयोग कर धोखाधड़ी करने और अलग-अलग तरह के साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जाता है।
  • इस कड़ाई का एक बड़ा मकसद पहचान की चोरी को रोकना है। जालसाज  अक्सर किसी दूसरे व्यक्ति के आधार विवरण या पहचान दस्तावेजों का अवैध रूप से इस्तेमाल करके उनके नाम पर मोबाइल कनेक्शन हासिल कर लेते हैं।
  • धोखाधड़ी करने वाले लोग दूसरों के नाम पर फर्जी सिम हासिल कर लेते हैं और फिर उनके जरिए पीड़ितों के बैंक खातों से अनधिकृत रूप से पैसे निकाल लेते हैं। सरकार इस तरह के गंभीर सिम फ्रॉड को देश में तेजी से कम करना चाहती है।
  • पहले ग्राहक अलग-अलग राज्यों या टेलीकॉम कंपनियों से पहचान छुपाकर सिम ले लेते थे क्योंकि ऑपरेटरों के पास आपस में डेटा क्रॉस-चेक करने का कोई केंद्रीय तरीका नहीं था। हालांकि, अब डीआईपी के माध्यम से ऑपरेटरों के पास पूरे देश के रिकॉर्ड की क्रॉस-नेटवर्क विजिबिलिटी होगी, जिससे इस तरह के उल्लंघन करना नामुमकिन हो जाएगा।

सिम को लेकर नए नियम। - फोटो : अमर उजाला

सवाल-9: ग्राहक कैसे पता कर सकते हैं अपने सिम की संख्या?

नया सिम आवेदन करने से पहले ग्राहकों को संचार साथी पोर्टल या मोबाइल ऐप पर जाकर अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच कर सकते हैं। वहां 'Know mobile connections in your name' (अपने नाम पर लिए मोबाइल कनेक्शन्स को जानें) विकल्प पर जाकर आप सभी पंजीकृत नंबरों को देख सकते हैं और अगर कोई ऐसा नंबर दिखता है जो आपका नहीं है या जिसकी अब आपको जरूरत नहीं है, तो उसे तुरंत रिपोर्ट करके ब्लॉक करा सकते हैं।


सवाल-10: नया सिम लेने से पहले अब ग्राहकों के लिए क्या जरूरी?

अब जब भी आप नया सिम कार्ड लेने जाएंगे, तो आपको कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) में एक स्व-घोषणा पत्र देना होगा। इसमें आपको अपने नाम पर पहले से पंजीकृत सभी सक्रिय मोबाइल नंबरों की स्पष्ट जानकारी लिखनी होगी। चाहे वे नंबर किसी भी अन्य टेलीकॉम कंपनी के हों या किसी भी राज्य/सर्किल के हों, उन सभी को फॉर्म में दर्शाना अनिवार्य है।
विज्ञापन

इसके अलावा नया सिम लेने से पहले ग्राहकों को यह पक्का करना होगा कि नए सिम को मिलाकर उनके पास कुल कनेक्शन स्वीकृत कानूनी सीमा के अंदर ही हों। भारत के अधिकतर हिस्सों में ग्राहक अपने नाम पर अधिकतम नौ सिम रख सकते हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा छह सिम की है। अगर ग्राहक पहले से ही इस सीमा पर हैं, तो ऑपरेटर नया सिम जारी करने से मना कर देगा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें