Adani Row: अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर नई जनहित याचिका (पीआईएल) में बड़े कॉरपोरेट घरानों को दिए गए 500 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण की मंजूरी नीति की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
अदाणी-हिंडनबर्ग मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। जिसमें शीर्ष अदालत से हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक समिति गठित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में अदाणी समूह के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर नई जनहित याचिका (पीआईएल) में बड़े कॉरपोरेट घरानों को दिए गए 500 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण की मंजूरी नीति की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
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पिछले हफ्ते भी, शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के शॉर्ट सेलर नेथन एंडरसन और उनके सहयोगियों के खिलाफ कथित रूप से निवेशकों का शोषण करने और बाजार में अदाणी समूह के शेयरों को प्रभावित करने के लिए मुकदमा चलाने की मांग की गई थी।
गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा 25 जनवरी 2023 को जारी की गई 32 हजार शब्दों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अदाणी समूह लंबे समय से शेयरों की हेरफेरी और अकाउंट की धोखाधड़ी में शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन साल में शेयरों की कीमतें बढ़ने से अदाणी समूह के संस्थापक गौतम अदाणी की संपत्ति एक अरब डॉलर से बढ़कर 120 अरब डॉलर हो गई। इस दौरान समूह की सात कंपनियों के शेयर औसत 819 फीसदी बढ़े हैं।
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इस रिपोर्ट के आने के बाद से अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर धराशायी हो गए। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अदाणी समूह के शेयरों में 85 प्रतिशत तक की गिरावट की संभावना है। ऐसा कंपनी के आसमान छूते वैल्युएशन के कारण है। हालांकि, अदाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कही गई बातों का खंडन किया है।