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New Parliament Building: नए संसद भवन का सावरकर के जन्मदिन पर उद्घाटन, अब क्यों चुप हैं राहुल गांधी?

अमित शर्मा
Updated Sun, 28 May 2023 05:41 PM IST

सार

कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसकी वजह महाराष्ट्र की राजनीति और शिवसेना से कांग्रेस की नजदीकी हो सकती है। सावरकर को महाराष्ट्र के मराठी समुदाय में बड़े सम्मान के साथ देखा जाता है।
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नया संसद भवन। - फोटो : PTI


सावरकर पर अब क्यों चुप हैं राहुल गांधी? 

कांग्रेस ने नई संसद की आवश्यकता, इस पर हुए भारी खर्च और सेंगोल के इतिहास को लेकर कई गंभीर प्रश्न उठाए हैें, लेकिन राहुल गांधी ने वीर सावरकर के जन्मदिन पर नई संसद के उद्घाटन के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है। इसके पहले भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने सावरकर को लेकर कड़ा बयान दिया था। इससे अचानक उनकी यात्रा सुर्खियों में आ गई थी। उनका यह बयान भी काफी सुर्खियों में रहा था कि 'मैं सावरकर नहीं हूं, माफी नहीं मांगूंगा'। 


इसलिए चुप हैं राहुल

कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसकी वजह महाराष्ट्र की राजनीति और शिवसेना से कांग्रेस की नजदीकी हो सकती है। सावरकर को महाराष्ट्र के मराठी समुदाय में बड़े सम्मान के साथ देखा जाता है। शिवसेना उन्हें अपना आदर्श पुरुष बताती रही है। राहुल गांधी ने जब सावरकर को लेकर बयान दिया था, तब भी शिवसेना ने अपनी आपत्ति जताई थी। अब चूंकि कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए एक बड़े गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है, वह महाराष्ट्र में अपनी एक मजबूत सहयोगी को खोना नहीं चाहेगी। यही कारण है कि सावरकर पर अब तक बेहद आक्रामक रहे राहुल गांधी इस मामले पर चुप हैं।


RJD ने क्या कहा?

राष्ट्रीय जनता दल नेता नीरज कुमार ने नई संसद के उद्घाटन को वीर सावरकर के जन्मदिन से जोड़ते हुए कहा है कि नई संसद के नाम पर देश का इतिहास बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि बहुत सोच समझकर नई संसद का उद्घाटन वीर सावरकर के जन्मदिन पर किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को मंदिरों को तोड़ने वाला बताते हुए कहा कि पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल की भूमिका को समाप्त कर दिया गया क्योंकि उसका इतिहास पंडित नेहरू से जुड़ा हुआ था।  


राजद को क्या लाभ?

राष्ट्रीय जनता दल इस समय भी मंडल युग के मुद्दों को उठाकर पिछड़ी-दलित जातियों को एक साथ लाने की राजनीति कर रही है। इसी मुद्दे के सहारे वह 2024 में अपनी मजबूत भूमिका तलाश रही है, लिहाजा यह मुद्दा उसे सूट करता है। इन जातियों के सहारे वह इनके बीच ज्यादा लोकप्रिय होने की कोशिश कर रही है। इसके पहले तुलसीदास और रामचरितमानस पर विवादित बयान देकर भी पार्टी ने यही कोशिश की थी। हालांकि, नीतीश कुमार ने अपनी बड़ी भूमिका को देखते हुए इन विवादों से किनारा कर लिया है।


सोशल मीडिया पर उठा तूफान

राजद की राजनीति का तुरंत असर भी देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी नई संसद के बहाने सावरकर की राजनीति को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि सावरकर के जन्मदिन पर नई संसद का उद्घाटन कर आरएसएस-भाजपा अपनी विचारधारा देश पर थोपने की कोशिश कर रही हैं। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय की पुस्तकों में भी मुगलों को हटाने, गांधी से पहले सावरकर को पढ़ाने का मुद्दा गरमाया था। इस मुद्दे ने उन बिंदुओं को दुबारा चर्चा में ला दिया है और कहा जा रहा है कि देश के इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही है।

 

शिवसेना (शिंदे गुट) ने स्वागत किया

महाराष्ट्र सरकार में शामिल प्रमुख दल शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने कहा है कि यह राज्य के लिए गौरव की बात है कि नई संसद का उद्घाटन सावरकर के जन्मदिन पर हो रहा है। इससे उन्हें वह सम्मान प्राप्त होगा जिसके वे अधिकारी थे, लेकिन उससे आज तक उन्हें वंचित रखा गया। 
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नई संसद में सावरकर को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने नई  संसद के हॉल में वीर सावरकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। चूंकि, सावरकर कठोर हिंदुत्ववादी विचारों के पोषक माने जाते थे, नई संसद में उन्हें श्रद्धांजलि देने पर विपक्ष नाराज है। 

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