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देश में तीन महीने में तैयार होंगे नए ऑक्सीजन प्लांट, एक के निर्माण में आएगी 75 लाख की लागत

Thu, 06 May 2021 12:10 AM IST
Jeet Kumar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

कोविड 19 की इस दूसरी लहर में इन प्लांट का फायदा नहीं मिलेगा। क्योंकि इन्हें तैयार होने में करीब तीन माह का समय लग सकता है।
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ऑक्सीजन प्लांट - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश में ऑक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इस बीच केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन की पूर्ति करने की भी तैयारी कर ली है। सरकार ने 500 प्रेशर स्विंग ऐडसॉप्र्शन (पीएसए) इकाई या ऑन-साइट ऑक्सीजन जनरेटर इकाइयां विकसित करने का ऑर्डर दिया हैं।

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पीएसए की एक प्लांट को तैयार होने में 75 लाख रुपए समेत कुछ कर की लागत आ रही है। हालांकि कोविड 19 की इस दूसरी लहर में इन प्लांट का फायदा नहीं मिलेगा। क्योंकि इन्हें तैयार होने में करीब तीन माह का समय लग सकता है।

ये पीएसए प्लांट वायुमंडलीय वायु से ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं जिसे बाद में शुद्ध किया जाता है। इसके बाद मरीजों को पाइप के जरिए इसकी आपूर्ति की जाती है। ऐसी ऑक्सीजन के लिए 99.5 प्रतिशत शुद्धता होना आवश्यक है। साधारण वायु में 21 प्रति ऑक्सीजन, 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 0.9 प्रतिशत आर्गन और 0.1 प्रतिशत अन्य गैसें होती हैं।
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केंद्र सरकार ने प्रेशर स्विंग ऐडसॉप्र्शन (पीएसए) इकाई लगाने का यह टेंडर टाटा एडवांस सिस्टम और ट्राइडेंट न्यूमेटिक्स को दिया है। इनमें से, 450 पीएसए तैयार करने का ऑर्डर टाटा समूह की कंपनी को मिला तो वहीं शेष प्लांट का निर्माण ट्राइडेंट द्वारा किया जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 150 जिला अस्पतालों के लिए अक्टूबर 2020 में पीएसए इकाई बनाने के लिए निविदाएं मंगाई थी लेकिन इनमें से अधिकांश इकाइयां स्थापित नहीं की गई।

वर्तमान निविदा के लिए तीन महीने की समय सीमा को बेंचमार्क के रूप में मानते हुए ये पीएसए अब परिचालन शुरू कर सकते थे क्योंकि निविदाओं को नवंबर में दिया गया था। ये निविदाएं 21 अक्टूबर 2020 को जारी की गई थी और बोलियां 11 नवंबर, 2020 को खोली गई थीं।  

18 अप्रैल के स्वास्थ्य मंत्रालय के ट्वीट के मुताबिक,केंद्र सरकार ने 162 पीएसए संयंत्र स्वीकृत किए गए थे। लेकिन मंत्रालय ने टेंडर को अंतिम रूप देने में देरी की। जिसके कारण आज आक्सीजन कमी देखने को मिल रही है।

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