शोरगुल फिल्म रिलीज होने से पहले ही छाई विवादों में।
फिल्म ‘शोरगुल’ रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। बृहस्पतिवार को सरधना विधायक संगीत सोम इस फिल्म के विरोध में खुलकर उतर आए। वहीं, हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में विधायक समर्थक ने फिल्म निर्देशक के खिलाफ याचिका दायर की है। इस पर आगामी छह जून को सुनवाई होगी। उत्तर प्रदेश की सियासी पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म के कुछ दृश्यों पर विधायक सोम ने तीखी आपत्ति जतायी है। साथ ही फिल्म किसी सूरत में रिलीज न होने देने और न चलने देने का एलान किया है।
इस फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर वायरल होने पर सरधना स्थित विधायक संगीत सोम के कैंप कार्यालय पर दिन भर समर्थकों का तांता लगा रहा। समर्थकों ने आरोप लगाया कि इस फिल्म में जिमी शेरगिल की भूमिका में विधायक संगीत सोम जैसा किरदार दिखाई देता है। यह ट्रेलर देखकर समर्थकों में भारी रोष है। जिसके चलते ही विधायक समर्थक और छात्र नेता मिलन सोम ने लखनऊ हाईकोर्ट में फिल्म निर्देशक के खिलाफ याचिका दायर कर दी। वहीं, विधायक ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि इस फिल्म को न तो किसी कीमत पर रिलीज होने देंगे और न ही चलने देंगे।
फिल्म से जुड़े सूत्रों की मानें तो ‘शोरगुल’ में बाबरी ध्वंस, गोधरा दंगों की बातें की गई हैं। वहीं, विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस फिल्म की कहानी बाबरी ध्वंस और गोधरा के साथ ही मुख्य रूप से मुजफ्फरनगर दंगे के इर्द गिर्द है। जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री को दंगा रोकने के लिये हीरो और दंगा भड़काने में विधायक को विलेन के रूप में दिखाया गया है।
विधायक ने बताया कि वह कभी बीड़ी सिगरेट तक नहीं पीते, लेकिन उनके मिलते लुक जैसे किरदार को शराब पीते दिखाया गया है। उनके निजी जीवन पर आधारित फिल्म बनाने से पहले फिल्म निर्माताओं ने उनसे बात तक नहीं की। वह कानून से सड़क तक की लड़ाई लड़ेंगे और फिल्म को नहीं चलने देंगे।
‘सीएम को नहीं कानून व्यवस्था पर भरोसा’
विधायक संगीत सोम ने आरोप लगाते हुए कहा कि दादरी प्रकरण में इखलाक के घर मिले मीट के बीफ होने की पुष्टि होने और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा इखलाक के समर्थन में उतरना सरकार की नीति को स्पष्ट करता हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मथुरा लैब की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े करना यही साबित करता है कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की कानून व्यवस्था पर ही भरोसा नहीं है।