उन्होंने कहा, हैरान कर देने वाली बात यह है कि ट्विटर भारतीय कानूनों के मुताबिक, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित कर अपने यूजर्स की शिकायतों का समाधान करने में नाकाम रहा। इसके बजाय उसने मैनुपलेट मीडिया की नीति का अनुसरण किया, लेकिन उसने इस टैगिंग का इस्तेमाल भी अपनी सुविधानुसार किया। जब उसे अच्छा लगा तो मैनुपलेटेड टैग लगा दिया और जब नापसंद रहा तो ऐसा नहीं किया। प्रसाद ने कहा कि जो कुछ भी हाल ही में उत्तर प्रदेश में घटित हुआ, वो ट्विटर की फेक न्यूज के खिलाफ अतार्किकता को दर्शाता है।
बोले- भारतीय कंपनियां जहां व्यापार करती हैं, वहां कानून मानती हैं..
ट्विटर एक ओर अपनी फैक्ट चेक सिस्टम को लेकर उतावला रहा, लेकिन वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग की दाढ़ी काटे जाने जैसी परेशान करने वाली खबरों के मामले में त्वरित कार्रवाई करने में विफल रहा। उसने भ्रामक जानकारी को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। प्रसाद ने कहा कि भारतीय कंपनियां, चाहे आईटी, फार्मा या अन्य क्षेत्र की हों, वो जब अमेरिका या अन्य देशों में कारोबार करने जाती हैं तो वहां के स्थानीय कानूनों का पालन करती हैं।