पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की सत्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। लंबे समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद देश में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी बीच आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी को अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था का हिस्सा बनाए जाने की खबर सामने आई। हालांकि अब सोशल मीडिया पर उनके मारे जाने के दावे तेजी से फैल रहे हैं, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व ने खामेनेई की मौत के बाद स्थिरता बनाए रखने के लिए एक अंतरिम नेतृत्व परिषद बनाई थी। इस व्यवस्था के तहत आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। उनका काम सत्ता परिवर्तन के संवेदनशील दौर में प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना बताया गया। लेकिन कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि पद संभालने के कुछ घंटों बाद ही हवाई हमले में उनकी मौत हो गई।
मौत की खबरों पर नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि
अब तक ईरान की सरकारी मीडिया, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों या किसी विदेशी सरकार ने अराफी की मौत की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह खबरें केवल सोशल मीडिया आधारित दावे हैं और इन्हें अफवाह के तौर पर देखा जा रहा है। विश्व स्तर पर सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
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कौन हैं आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी
आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी ईरान के वरिष्ठ धार्मिक नेता माने जाते हैं और देश की शक्तिशाली संवैधानिक संस्था गार्जियन काउंसिल से जुड़े रहे हैं। उन्हें अंतरिम तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद में शामिल किया गया, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख भी शामिल हैं। यह परिषद स्थायी सुप्रीम लीडर चुने जाने तक देश की सर्वोच्च जिम्मेदारियां संभालती है।
ईरान में सत्ता हस्तांतरण की संवैधानिक प्रक्रिया
ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत सुप्रीम लीडर की मौत या अक्षम होने की स्थिति में अस्थायी नेतृत्व परिषद बनाई जाती है। यह परिषद देश की सुरक्षा, शासन और संस्थागत व्यवस्था को बनाए रखती है। इसके बाद एक्सपर्ट्स की असेंबली नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करती है। यह प्रक्रिया बेहद दुर्लभ और संवेदनशील मानी जाती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
ईरान में नेतृत्व बदलाव और इस्राइल-ईरान तनाव के बीच दुनिया भर की सरकारें हालात पर नजर रख रही हैं। कई देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने और सैन्य टकराव रोकने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अराफी की मौत की खबर सही साबित होती है तो ईरान की अंतरिम सत्ता व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में नए धार्मिक प्रतिनिधि की नियुक्ति और स्थायी सुप्रीम लीडर चुनने की प्रक्रिया तेज करनी पड़ेगी। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि न होने के कारण स्थिति को बेहद संवेदनशील और बदलती हुई माना जा रहा है।
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