मधुमेह पीड़ित व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य व्यक्ति की तुलना में कमजोर होती है। इम्यूनिटी कम होने के कारण शरीर में संक्रमण का स्तर बढ़ता चला जाता है और स्थिति खराब हो जाती है।
मौत का कारण वायरल लोड बढ़ना
शुगर के कारण रक्त वाहिकाएं पूरी तरह से बंद हो जाती हैं। इस कारण शरीर में कोशिकाओं को रक्त पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। खासतौर पर संक्रमण को मारने के लिए इस कारण वायरस को शरीर की इम्युनिटी मार नहीं पाती है और समय के साथ शरीर में वायरल लोड बढ़ने से रोगी की मौत हो जाती है।
89% टाइप-टू डायबिटीज मरीज
वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध में शामिल 89 फ़ीसदी संक्रमित टाइप-टू डायबिटीज के थे। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि अधिकतर मरीज संक्रमण होने की के 5 दिन बाद आए, जब उनमें लक्षण दिखने लगा इसका मतलब ये कि 10 फीसदी मरीजों की मौत संक्रमण के 2 सप्ताह में हुई।
कई मरीजों की मौत 7 दिन के बाद ही हो गई होगी
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इंटेंसिव केयर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ डनकैन यंग का कहना है कि कोरोना वायरस में आए बहुत से मधुमेह रोगी 7 दिन के बाद मरे होंगे। वह कहते हैं कि 7 दिन बाद शरीर में वायरल लोड बढ़ा हुआ इस कारण मौत का ग्राफ अधिक होग। सबसे अधिक वे लोग शामिल होंगे, जिनका मधुमेह नियंत्रित नहीं होगा और वजन अधिक होगा।