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नई शिक्षा नीतिः इतिहास लिखने में पुरानी गलतियां नहीं दोहराएगी सरकार

Tue, 12 Jan 2021 04:42 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • वाजपेयी सरकार में इतिहास लिखने में उतार दिए गए थे आईएएस की किताब के कई पेज   
  • नई शिक्षा नीति के बाद पाठ्यक्रम और किताब लेखन की शुरू होगी प्रक्रिया
  • मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक ने ली समीक्षा बैठक
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रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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प्रधानममंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार मैराथन प्रयास करके और तीन मंत्रियों के कार्यकाल के बाद नई शिक्षा नीति लेकर आई है। इसे आने में ही करीब छह साल लग गए। नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षा मंत्रालय की स्कूली शिक्षा सचिव अनीता करवाल काफी होमवर्क कर रही हैं। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी लगातार तैयारियों की समीक्षा बैठक कर रहे हैं।

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सूत्र बताते हैं कि 13 जनवरी को नई शिक्षा नीति की तैयारी और पाठ्यपुस्तकों समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद की संसदीय समिति ने भी बैठक बुलाई है। इसके चेयरमैन राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे हैं। नई शिक्षा नीति के साथ ही फिर से इतिहास लिखे जाने की चर्चा जोर पकड़ रही है। संसदीय समिति के चेयरमैन सहस्रबुद्धे का कहना है कि कुछ लोग इसकी मांग कर रहे हैं, लेकिन इस विषय में वह कुछ नहीं कहना चाहते।

कुल मिलाकर सरकार पहले की गलतियों से सबक लेकर नई शिक्षा नीति को लागू करने में खास सावधानी बरत रही है। नए पाठ्यक्रम की एक रूपरेखा से लेकर नई किताब लेखन के मामले में भी मंत्रालय पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहता है।

पिछली बार तो इतिहास की किताब में उतार लिए थे पांच-छह पेज

सही इतिहास लेखन और किताब में पढ़ाए जाने के सवाल पर एनसीईआरटी के किताब लेखन से जुड़े पूर्व प्रमुख अधिकारी ने कहा कि कौन लिखेगा, सही इतिहास। सूत्र का कहना है कि डा. मुरली मनोहर जोशी मानव संसाधन विकास मंत्री थे। तब नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार हुई थी और किताब लेखन का काम शुरू हुआ था। बताते हैं तब इतिहास की एक लेखिका सीमा यादव ने आईएएस की किताब के पांच-छह पेज हू-ब-हू उतार लिया था। खूब हंगामा मचा था। संसद में भी खूब हो-हल्ला हुआ और एनसीईआरटी के तत्कालीन निदेशक जेएस राजपूत को सभी स्तरों पर सफाई देनी पड़ी थी।

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हालांकि एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत का कहना है कि किसी भी देश में सही इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए। इतिहास हमें हमारा गौरवशाली अतीत बताता है। राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र के आत्म सम्मान से जुड़ा विषय है। जेएस राजपूत कहते हैं कि यह दुर्भाग्य की बात है कि हम पिछले 35-40 साल से अधिक समय से दूषित इतिहास पढ़ रहे हैं। जेएस राजपूत भी मानते हैं कि इतिहास लेखन को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो सकता है।

क्या चाहते हैं शिक्षा मंत्री निशंक

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री देश में रोजगारमुखी, राष्ट्रीय स्तर पर शोध, अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली बहुमुखी प्रतिभा का विकास करने योग्य शिक्षा का मॉडल चाहते हैं। इसी को केन्द्र में रखकर शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों पर चर्चा के साथ इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि स्कूली शिक्षा सचिव अनीता करवाल को गुजरात में भी शिक्षा मंत्रालय में काम करने का अनुभव रहा है। उन्होंने देश के स्कूली शिक्षा के मॉडल पर काफी काम किया है और मंत्रालय इसे अंतिम रूप देने में जुटा है। इस क्रम में नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तथा भावी चुनौतियों को देखते हुए पाठ्यपुस्तकों का लेखन भी शामिल है।

पिछले 25-30 साल से पढ़ाया जा रहा है गलत इतिहास?

संघ और भाजपा से ही जुड़े एक मशहूर इतिहासकार हैं। उन्हें खुद ऐसे सवालों पर बड़ी कोफ्त होती है। सूत्र का कहना है कि वह विवाद में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन कहते हैं कि किताबों का लेखन, पठन-पाठन राज्यों का विषय है। राज्यों के पास अपना शिक्षा बोर्ड है और राज्यों के पास एससीईआरटी भी है। 1990 के बाद से गुजरात में भाजपा की सरकार है। पिछले 20 साल से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। राजस्थान, झारखंड में भाजपा की सरकारें आईं और गईं। उत्तर प्रदेश में कई बार भाजपा की सरकार बनी। महाराष्ट्र, कर्नाटक में भाजपा की सरकार रही है, मेरा सवाल है कि इन राज्यों में सही इतिहास के लेखन या छात्रों को सही इतिहास पढ़ाने के लिए क्या काम किए गए?

किताब लेखन के साथ सही इतिहास लेखन का यही है उपयुक्त समय

राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा कहते हैं कि नए इतिहास लेखन की मांग का सवाल सनातन है। उस पर कुछ नहीं बोलना है। लेकिन नई शिक्षा नीति को लेकर कोई समस्या है तो उस पर चर्चा की जा सकती है। लेकिन संघ के अनुषांगिक संगठन से जुड़े एक नेता का कहना है कि वह शिक्षा मंत्री निशंक के सामने अपनी बात रख आए हैं। हमारे देश के छात्रों को सही इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए। उन्हें विश्वास है कि केन्द्र सरकार इस दिशा में सही कदम उठाएगी। संघ की विचारधारा से जुड़े और शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय रहे दीनानाथ बत्रा से संबंद्ध करीबी नेता का कहना है कि आखिर अब सही इतिहास नहीं लिखा जाएगा तो अब कब यह समय आएगा?

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