अब बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लेने के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं रहेगी। या यूं कहें कि कोचिंग की दुकानदारी बंद हो जाएगी। क्योंकि अब रट्टा की बजाय प्रैक्टिकल अधिक होगा। बोर्ड परीक्षाओं से सभी छात्रों की योग्यताओं एवं क्षमताओं का सही आकलन नहीं हो पा रहा था।
इसलिए इनके स्वरूप को बदलने की जरूरत महसूस की गई है। साल में बोर्ड परीक्षा एक से अधिक बार भी हो सकती है। इन्हें ऑनलाइन आयोजित करने जैसे विकल्पों पर भी कार्य किए जाने की जरूरत है। ताकि बोर्ड परीक्षाएं तनाव का कारण नहीं बनें और इनके नतीजे छात्रों के लिए आनंददायक हों।