सशस्त्र बलों ने एक नया 'जॉइंट डॉक्ट्रिन' तैयार किया है ताकि आर्मी, नौसेना और भारतीय वायुसेना का आपस में तालमेल बेहतर हो सके। 'जॉइंट डॉक्ट्रिन' ये भी सुनिश्चित करेगा कि आर्मी, नौसेना और वायुसेना आपस में प्रभावी तरीके से योजना बनााएं और मिलकर काम कर सकें। इसमें पारंपरिक युद्धों से लेकर अनियमित और हाईब्रिड युद्ध तक से प्रभावी तरीके से निपटना शामिल हैं।
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इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि करीब 80 पेज का डॉक्ट्रिन औपचारिक रूप से अगले सप्ताह जारी किया जाएगा।
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सूत्रों के अनुसार, डॉक्ट्रिन में न सिर्फ व्यापक ढांचा, संयुक्त योजना और एकीकृत भूमि-हवाई-समुद्री-साइबर स्पेस युद्ध-लड़ने वाली मशीनरी बनाने की जरूरत के बारे में है। बल्कि इससे बड़े पैमाने पर दुनिया के सामने भारतीय सशस्त्र बलों के मकसद का संकेत भी जाएगा।
गौरतलब है कि चीन का एक विशाल सैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम और विशेष साइबर-युद्ध इकाइयां हैं। इसके अलावा चीन ने पिछले साल अपनी 2.3 मिलियन पीपल्स लिबरेशन आर्मी को पांच थियेटर कमान्ड्स में फिर से संगठित किया है। यह उसने बेहतर कमांड-एंड-कंट्रोल और अधिक आक्रामक क्षमता के लिए किया है।