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43 बदलावों के बाद बना नया कंपनी कानून, बढ़ेगी कारोबार सुगमता, मुकदमों का बोझ भी घटेगा

Fri, 26 Jul 2019 03:30 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सरकार ने लोकसभा में पेश किया संशोधित बिल 
  • सीएसआर फंड और कॉरपोरेट नियमों में तब्दीली
  • कंपनी अधिनियम 2013 में किए गए काफी बदलाव 
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संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (File Photo) - फोटो : PTI
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विस्तार
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कंपनी नियमों के उल्लंघन के बाद कॉरपोरेट जगत पर कड़ी कार्रवाई का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार ने बृहस्पतिवार को कंपनी संशोधन विधेयक-2019 लोकसभा में पेश किया। नए कानून में सीएसआर फंड के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन तैयार की गई है। इन बदलावों से देश में कारोबारी सुगमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 

कंपनी कानून में किया गया बदलाव कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानदंडों को मजबूत बनाएगा। इससे अनुपालन प्रबंधन में सुधार आएगा और कंपनियों की जवाबदेही बढ़ने के साथ बेहतर प्रवर्तन भी सुनिश्चित होगा।


नए कंपनी कानून के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉरपोरेट के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए सरकार को और शक्तियां मिलेंगी। यह कानून राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) को डिविजन और कार्यकारी निकायों के माध्यम से और सक्षम बनाएगा। विधेयक में कंपनी कानून-2013 के 16 सेक्शन में कुल 43 बदलाव किए गए हैं। 

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इसके तहत कंपनी रजिस्ट्रार को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे, ताकि अगर कोई कंपनी नियमों के अनुसार कारोबारी गतिविधियां नहीं चला रही तो रजिस्ट्रार उसका पंजीकरण रद्द कर सकेगा। इसके अलावा सेक्शन 135 में बदलाव कर कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के फंड को लेकर गाइडलाइन तैयार बनाई गई है। 

इसके तहत अगर किसी वित्त वर्ष में किसी निश्चित क्षेत्र की कंपनी को लाभ हुआ है तो वह अपने तीन साल के औसत लाभ का दो फीसदी सीएसआर गतिविधियों में खर्च कर सकेगी। अभी सीएसआर का बचा हुआ फंड विशेष खाते में जमा हो जाता है और इसे तीन साल के भीतर खर्च करना होता है। अगर यह फिर भी बची रहती है तो इसे अनुच्छेद-6 के तहत विशेष फंड में जमा कर दिया जाता है।

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एनसीएलटी और विशेष अदालतों से घटेगा मुकदमों का बोझ 

कंपनी संशोधन विधेयक पेश करते हुए सरकार ने कहा कि बदलाव से अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई के लिए अगर सरकार सक्षम होगी तो राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और विशेष अदालतों पर बढ़ते मुकदमों के भार में कमी आएगी। साथ ही नियमों का अनुपालन करने वाली कंपनियों को कारोबार करने में सहूलियत होगी। इस कदम से भारत की कारोबार सुगमता रैंकिंग में भी उछाल आएगा।
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