सुनंदा पुष्कर हत्याकांड
बिजनेस में अलग पहचान बना चुकीं सुनंदा पुष्कर का नाम च्रचा में तब आया जब उनकी शादी कांग्रेस नेता शशि थरूर से की। यह शादी सुनंदा को बिल्कुल नहीं जंची। शादी के कुछ दिन बाद जब सुनंदा का शव दिल्ली के लीला पैलेस होटल के कमरा संख्या 345 में मिला, तो सनसनी फैल गई। सुनंदा की मौत की सूचना पुलिस को शशि थरूर ने ही दी थी। शरूर ने बताया था कि सुनंदा सो रही थीं, काफी देर तक जगाने पर भी दब वह नहीं उठीं तो शक हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस को फोन किया।
पोस्टमार्टम में आत्महत्या का शक जाहिर हुआ, लेकिन एम्स के डॉक्टरों ने भी स्पष्ट किया कि सुनंदा के शरीर पर चोट के निशान थे और उनके शरीर में ड्रग्स की अधिक मात्रा पाई गई थी। सुनंदा की मौत की परिस्थिति अपने आप में एक रहस्य है। बता दें कि साल 2004 में पाकिस्तान की एक महिला पत्रकार मेहर तरार के ट्विटर अकाउंट से शशि थरूर को एक मैसेज भेजा गया था। गलती से यह मैसेज ट्विटर फीड पर पोस्ट के रूप में शेयर हो गया। इस संदेश में मेहर ने थरूर से अपने प्रेम का इजहार किया था।
इसके बाद से ही थरूर और सुनंदा के बीच अनबन शुरू हो गई थी। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर दोनों से सब ठीक होने की बात कही थी, लेकिन इसके कुछ दिनों बाद की सुनंगा की मौत की खबर ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया। छह जनवरी 2015 को पुलिस ने दावा किया कि सुनंदा ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या की गई थी। मामला अभी भी अदालत में है।
आरुषि तलवार हत्याकांड
आरुषि तलवार हत्याकांड को अगर देश का सबसे उलझा हुआ हत्याकांड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। आरुषि तलवार हत्याकांड ऐसा मामला है जिसमें हत्या से संबंधित सभी लोगों को हिरासत में लिया गया और समय के साथ नए-नए मोड़ आते गए।
16 मई 2018 को आरुषि तलवार का शव उसके कमरे में मिला था। हत्या का शक सबसे पहले नौकर हेमराज पर गया, लेकिन अगले ही दिन हेमराज का शव भी उसी इमारत की छत पर मिला जिसमें तलवार परिवार का घर था। इसके बाद गया घर के पुराने नौकर विष्णु शर्मा पर। हालांकि, पुलिस ने अपनी जांच में आरुषि के पिता डॉ. राजेश को मुख्य आरोपी बताया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले की जांच सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने भी की। सीबीआई की जांच में नौकर को क्लीन चिट दे दी गई। सीबीआई ने भी उंगली माता-पिता यानी तलवार दंपत्ति की ओर उठाई। नवंबर 2013 में आरुषि के पिता राजेश और मां नुपूर तलवार को आरुषि और हेमराज की हत्या में दोषी करार देते हुए सीबीआई की एक विशेष अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन, साल 2017 में तलवार दंपत्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
जेसिका लाल हत्याकांड
मशहूर मॉडल जेसिका लाल की 29 अप्रैल 1999 की रात दिल्ली के टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में गोली मारकर केवल इसलिए हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने शराब परोसने से मना कर दिया था। गोली चलाने वाला व्यक्ति कद्दावर कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा का बेटा मनु शर्मा था। सात साल तक चले इस मुकदमे के बाद फरवरी 2006 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
लेकिन, जेसिका की बहन ने चुप्पी न साधते हुए मामले को मीडिया के माध्यम से जनता के सामने रखा। उसके बाद तो जेसिका लाल मर्डर केस में इंसाफ के लिए देश भर में चिंगारी सी भड़क गई। केस दोबारा खुला और फास्ट ट्रैक कोर्ट में लगातार 25 दिनों तक मामले की सुनावई चली। इसके बाद हत्यारे मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
निठारी कांड
देश के आपराधिक इतिहास के पन्नों पर नजर डालने पर इसमें दर्ज निठारी कांड को सबसे कुत्सित कांड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इंसान की रूह कंपाने वाला यह मामला नोएडा में हुआ। नोएडा के निठारी गांव की कोठी संख्या पांच से नर कंकाल मिलने शुरू हुए। जांच के दौरान सीबीआई को 40 ऐसे पैकेट मिले थे, जिनमें मानव अंगों को भरकर नाले में फेंक दिया गया था। पुलिस ने मामले में कोठी को मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था।
कोली नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित था, इसलिए कोठी के आसपास आने वाले बच्चों को पकड़ कर उनके साथ दुष्कर्म करता और फिर उनकी हत्या कर देता था। हालांकि निठारी गांव के लोगों का कहना है कि पंढेर की कोठी से शरीर के अंगों का व्यापार होता था। इस मामले में पिछले दिनों 11वीं हत्या को लेकर सुरेंद्र कोली को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है।
तंदूर मर्डर केस
देश का सबसे खौफनाक और चौंकाने वाला तंदूर मर्डर केस उसी नैना साहनी की दर्दनाक कहानी है जिसे उसके पति ने टुकड़ों में काट कर अपने रेस्तरां की जलती हुई भट्ठी में झोंक दिया था। साहनी के पति और कांग्रेस विधायक सुशील शर्मा को 18 साल बाद दोषी करार दिया गया और सजा सुनाई गई।
मामले की जांच के बाद पता चला कि सुशील को शक था कि उसकी पत्नी के किसी और व्यक्ति के साथ अवैध संबंध हैं। एक दिन शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी को अपने ही करीबी दोस्त मतलूब करीम से फोन पर बात करते सुन लिया था, जिसके कारण गुस्से में आकर इस वारदात को अंजाम दे दिया।
साइनाइड मल्लिका उर्फ केजी केम्पम्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
साइनाइड मल्लिका
बंगलूरू की रहने वाली केजी केम्पम्मा को साइनाइड मल्लिका के नाम से जाना जाता है। केम्पम्मा को देश की सबसे पहली महिला सीरियल किलर माना जाता है। अपने आप को पवित्र और महाभक्त बताने वाली मल्लिका ने 1999 से 2007 के बीच छह महिलाओं को साइनाइड खिला कर मार डाला था। दरअसल वह मंदिरों के आसपास मानसिक रूप से परेशान महिलाओं को खोजती, उनको भरोसा दिलाती थी कि पूजा-पाठ से वह सब ठीक कर देगी।
परेशान महिलाओं की हमदर्द बनने का नाटक करते करते वह उन्हें मौत के घाट उतार देती थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इन वारदातों में उसके अलावा किसी और की कोई भागीदारी नहीं थी। औरतों को बहलाने से लेकर हत्या करने तक का पूरा काम मल्लिका बड़ी सफाई के साथ अकेले ही करती थी। मल्लिका की आखिरी शिकार बंगलूरू की नागवेणी थी, जिसे उसने साल 2007 में मारा था।
मल्लिका को साल 2007 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अप्रैल 2012 में उसे सजा-ए-मौत दी गई, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। उसके खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं मिल पाने के कारण अदालत ने इस केस को 'रेयरेस्ट ऑफ दि रेयर' घोषित कर दिया।