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संसद में पास हुआ नया कानून बैंकों का पैसा दबाना होगा मुश्किल

Fri, 13 May 2016 06:58 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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संसद
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 बैंकों से ऋण लेकर अब उसे चुकाए बिना कोई कंपनी या फर्म मौज नहीं कर सकती है, क्योंकि संसद से दिवालिया विधेयक पारित हो चुका है। इससे जहां बैंकों को एक बड़ा हथियार मिल जाएगा, वहीं इससे घाटे में चल रही कंपनी को बंद करने से पहले कर्मचारियों और बैंकों की देयताओं की वापसी करना भी आसान हो जाएगा।
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इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड- 2016 पर केन्द्रीय वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह वस्तु एवं सेवा कर के बाद दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक सुधार का कदम है। यह लोकसभा से बीते 5 मई को ही पारित हो गया था और 11 मई को राज्य सभा से भी पािरत हो गया। इसी के साथ भारत ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल कर लिया है।

सरकार का मानना है कि किसी कारोबारी द्वारा बैंकों का कर्ज चुकता न किए जाने से न सिर्फ  बैंकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी कमजोर होती है। 
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क्या है दिवालिया विधेयक

कई सांसदों का कार्यकाल हो रहा है खत्म - फोटो : PTI
दिवालिया विधेयक के कानून बनने पर बीमार कंपनियों को दिवालिया घोषित करने से संबंधित कानूनी जटिलताएं कम होंगी। घाटे से जूझ रही कंपनी को बंद कर उसकी परिसंपत्तियों को बेचने और देनदारों का भुगतान करने जैसे कदम पहले की तुलना में जल्दी और आसानी से उठाये जा सकेंगे। इसमें एक नये नियामक, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया, के गठन का प्रस्ताव है। इसके जरिये कंपनी के दिवालिया होने से जुड़ी तमाम प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जायेगा। 

भारतीय कंपनी सचिव संस्थान की अध्यक्ष ममता बिनानी का कहना है कि इस विधेयक के कानून बन जाने से जहां कारोबार से निकलना आसान होगा, वहीं घाटे में चल रही कंपनियों के पुनरोद्धार की प्रक्रिया भी आसान होगी। यही नहीं, इसके कानून बन जाने के बाद कई कानूनों के पालन करने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी।

एसएमसी ग्लोबल के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट (रिसर्च) सौरभ जैन का कहना है कि इसके संसद से पारित हो जाने के कदम को बाजार सकारात्मक रूख के रूप में देख रहा है। सरकार ने पहले जो मंशा जतायी थी, उसे अब कानूनी रूप दे दिया गया है। लेकिन इसमें बैंकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। 
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