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कारगिल विजय दिवस: 'कभी दुश्मन पर न करें भरोसा, चाहे वह पाकिस्तान हो या चीन', पूर्व सेना प्रमुख का संदेश

Tue, 25 Jul 2023 06:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, द्रास (लद्दाख)

सार

Kargil Vijay Diwas: सतर्क रहें और कभी भी अपने दुश्मन पर विश्वास न करें, चाहे वह पाकिस्तान हो या चीन। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक ने यहां बर्फीली चोटियों पर तैनात सशस्त्र बलों के लिए यह संदेश दिया है। 
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पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सतर्क रहें और कभी भी अपने दुश्मन पर विश्वास न करें, चाहे वह पाकिस्तान हो या चीन। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक ने यहां बर्फीली चोटियों पर तैनात सशस्त्र बलों के लिए यह संदेश दिया है। वर्ष 1999 के करगिल युद्ध के दौरान सेना प्रमुख रहे जनरल मलिक ने भरोसा जताया कि अगर आज युद्ध की स्थिति पैदा होती है तो भारत करगिल के समय की तुलना में बेहतर तरीके से तैयार है।

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उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध से उनकी सबसे बड़ी सीख यह है कि दुश्मन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, भले ही दोस्ती का 'राजनीतिक प्रदर्शन' हो। जनरल मलिक ने फरवरी 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित लाहौर घोषणापत्र को याद किया, जिसके तहत परमाणु दौड़ के साथ-साथ गैर-पारंपरिक और पारंपरिक दोनों संघर्षों से बचने की उनकी अतिरिक्त जिम्मेदारी थी।

उन्होंने कहा, अपने दुश्मन पर कभी भरोसा न करें, भले ही समझौतों पर हस्ताक्षर करने जैसा दोस्ती का राजनीतिक प्रदर्शन हो। करगिल युद्ध से पहले भी ऐसा हुआ था, दोनों देशों ने एक समझौते (लाहौर घोषणापत्र) पर हस्ताक्षर किए थे और हम आश्चर्यचकित रह गए थे। कुछ महीनों के भीतर उन्होंने मुजाहिदीन या जिहादियों के साथ नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के साथ हमारे क्षेत्र में घुसपैठ की।
 

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को सतर्क रहना चाहिए, चाहे वह चीन हो या पाकिस्तान, और अगर कोई देश राजनीतिक रूप से दोस्ती दिखा रहा हो या दिखा रहा हो तो भी आत्मसंतोष के लिए कोई जगह नहीं है। जनरल मलिक ने कहा, 'संघर्ष विराम हो या न हो, मैंने कई बार संघर्ष विराम टूटते देखा है। इसलिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, हमें एलएसी या एलओसी पर सतर्क रहना होगा।'
 
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उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध इस बात का सबूत है कि भारतीय सेना में दुश्मन को खदेड़ने की क्षमता और क्षमता है, भले ही वे आश्चर्यचकित हो जाएं। उन्होंने आगे कहा, अगर आज युद्ध की स्थिति पैदा होती है, तो हम लड़ने के लिए तैयार हैं, हम कहीं अधिक सुसज्जित और बेहतर तरीके से तैयार हैं। मानव संसाधन आज भी उतने ही अच्छे हैं जितने 24 साल पहले थे, लेकिन आज की तुलना में क्षमताओं में बहुत सुधार हुआ है।
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