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राष्ट्रवाद का मतलब केवल 'जय हिंद’ कहना या 'जन गण मन’ गाना नहीं है : वेंकैया नायडू

Sun, 24 Jan 2021 02:42 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Vice President M. Venkaiah Naidu - फोटो : ANI
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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शनिवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर कहा कि 'राष्ट्रवाद का मतलब केवल 'जय हिंद’ कहना या 'जन गण मन’ या 'वंदे मातरम’ गाना नहीं है। 'जय हिंद’ का मतलब हर भारतीय की जय हो है, जो तब संभव है जब उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाता है, उन्हें ठीक से खाना मिलता हो, कपड़े पहनें और भेदभाव का सामना न करें।'

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वेंकैया नायडू ने आगे कहा कि 'राष्ट्र का मतलब भौगोलिक सीमा नहीं है, राष्ट्र में सब कुछ है, उनका कल्याण, राष्ट्रवाद है। हमारी एक शानदार सभ्यता है जो एक दूसरे की  देखभाल करने और समस्याओं को साझा करने का प्रतीक है। हमारे पूर्वजों ने हमें 'विश्व एक परिवार है' के तत्त्वज्ञान दिए हैं।'

नायडू ने कहा कि 'स्वतंत्रता से, नेताजी का मतलब केवल राजनीतिक बंधन से मुक्ति नहीं था, बल्कि धन का समान वितरण, जातिगत बाधाओं का उन्मूलन और सामाजिक असमानताएं और सांप्रदायिकता और धार्मिक असहिष्णुता का विनाश था। आप अपने धर्म से प्रेम करते हैं और उसका पालन करते हैं लेकिन दूसरों से घृणा नहीं कर सकते हैं।'
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उप राष्ट्रपति ने युवाओं से अनुरोध किया कि वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से प्रेरणा लें और समाज से गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक व लैंगिक भेदभाव और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए काम करें।

बोस की जयंती को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाने के फैसले की सराहना की
भारत की 65 प्रतिशत आबादी के 35 साल से कम उम्र के होने का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा कि युवाओं को नए भारत 'एक खुशहाल व समृद्ध भारत जहां सभी के लिए समान अवसर हों और जहां किसी तरह का भेदभाव न हो' के लिए आगे आकर नेतृत्व करना चाहिए। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'पराक्रम' या साहस नेताजी के व्यक्तित्व की सबसे अहम खासियत थी। उन्होंने बोस की जयंती को 'पराक्रम दिवस' के तौर पर मनाने के सरकार के फैसले की भी सराहना की।

नायडू हैदराबाद में तेलंगाना सरकार के एमसीआर मानव संसाधन विकास संस्थान में बुनियादी (फाउंडेशन) पाठ्यक्रम में शामिल प्रशिक्षु अधिकारियों को बोस की जयंती पर संबोधित कर रहे थे। बोस और कुछ अन्य स्वतंत्रता सेनानियों व विभिन्न क्षेत्रों के गुमनाम नायकों तथा समाज सुधारकों द्वारा अदा की गई उल्लेखनीय भूमिका के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को उनकी महानता के बारे में नहीं पता है क्योंकि उनके योगदान का इतिहास की किताबों में समुचित उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपने कई महान नेताओं की जयंती का जश्न मनाना चाहिए। हमें औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आना होगा।

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