इसे भारतीय दूर संचार कंपनियों की काहिली कहें अथवा नेपाली टेलीकॉम कंपनियों की एडवांस तकनीकी कि बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को अपने ही देश में बात करने के लिए सवा दो रुपये प्रति मिनट की दर से भुगतान नेपाल को करना पड़ रहा है।
देश की अंतिम छोर पर बसे सोनौली शहर में बीएसएनएल के टावर तो लगे हैं, मगर उपभोक्ताओं के मोबाइल में उसका नेटवर्क नहीं आता, जबकि नेपाली टेलीकॉम और नेपाल में निजी क्षेत्र की सेल्युलर कंपनी एनसीईएल का टावर न होने के बाद भी इन कंपनियों का सोनौली शहर में भरपूर नेटवर्क मिलता है।
मजबूरन लोगों को नेपाली सिम का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसकी कॉल दर करीब सवा दो रुपये प्रति मिनट पड़ती है।