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एक और भारतीय ने लहराया परचम, निओमी राव बनीं अमेरिका के वरिष्ठ न्यायपालिका की जस्टिस

Sun, 18 Nov 2018 02:11 PM IST
भाषा, नई दिल्ली, अमर उजाला
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निओमी राव
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विदेशों में बसे भारतीय अपनी अद्भुत प्रतिभा और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचने का माद्दा रखते हैं। दुनिया के हर हिस्से में भारतीय मूल के लोगों ने अपना परचम बुलंद किया है और निओमी राव भी एक ऐसा ही नाम है, जो अमेरिका की न्यायपालिका में सितारे की तरह चमक रही हैं।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निओमी राव को डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ब्रैट कानवाह की जगह लेने के लिए नामित किया है। इस कोर्ट में नामित होने की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के बाद डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स को सबसे शक्तिशाली माना जाता है।

सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद निओमी राव डीसी सर्किट कोर्ट में श्रीनिवासन के बाद दूसरी भारतीय अमेरिकी जज होंगी। वर्तमान में सूचना एवं नियामक मामलों के कार्यालय में अधिकारी निओमी राव जुलाई 2017 में सीनेट द्वारा 54-41 के मतदान से इस पद पर चुनी गई थीं।
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अमेरिका के कानूनी हलकों में राव एक सम्मानित नाम हैं और उन्हें अपने क्षेत्र के माहिर के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने अपनी शिक्षा और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। येल एवं शिकागो यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट राव ने निजी क्षेत्र में भी काम किया है। उन्हें लंदन स्थित कानूनी फर्म के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता समूह क्लिफोर्ट चांस एलएलपी में काम करने का भी अनुभव है।

इससे पहले राव संघीय सरकार की सभी तीन शाखाओं में काम कर चुकी हैं। वह जॉर्ज बुश प्रशासन के लिए सहयोगी वकील और विशेष सहायक के तौर पर काम कर चुकी हैं। जुलाई 2017 में ट्रंप प्रशासन में शामिल होने से पहले राव जीएमयू में एसोसिएट लॉ प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थीं।

भारतीय मूल के पारसी परिवार में जरीन राव और जहांगीर नारीओशंग राव के यहां 22 मार्च 1973 को जन्मी निओमी जहांगीर राव का बचपन मिशिगन के ब्लूमफील्ड हिल्स इलाके में गुजरा और डेट्रायट कंट्री डे स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से विशिष्ट योग्यता के साथ स्नातक की उपाधि हासिल की। फिर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो लॉ स्कूल से आगे की पढ़ाई की। इस दौरान विषय पर उनकी पकड़ और समझ के दम पर वह कई मौकों पर अपनी खास पहचान बनाने में कामयाब रहीं।

उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश क्लेरेंस थामस और फोर्थ सर्किट के लिए कोर्ट ऑफ अपील्स के न्यायधीश जे हार्वी विल्कंसन तृतीय के लिए क्लर्कशिप की और उसके बाद लंदन में ब्रिटिश लॉ फर्म क्लिफोर्ड चांस से जुड़ गईं। उसके बाद वह राष्ट्रपति जार्ज बुश के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस के विधि विभाग से जुड़ गईं। 

बैंकिंग से लेकर मार्केटिंग तक दुनिया का कोई भी क्षेत्र हो, भारतीय मूल के लोगों का नाम गाहे बगाहे किसी न किसी उपलब्धि के साथ जुड़ा दिखाई देता है और अब निओमी जहांगीर राव के रूप में देश की एक बेटी अमेरिका के उपलब्धियों से भरे आसमान में अपने लिए एक चमकीला मुकाम बनाने में कामयाब रही है। यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

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