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NEET, JEE परीक्षा: यहां 500 किमी दूर हैं परीक्षा केंद्र, ट्रेन-बसों का परिचालन है बंद, कैसे पहुंचेंगे गरीब छात्र

Wed, 26 Aug 2020 06:03 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • परीक्षा सेंटर के दूर होने पर एक दिन पहले पहुंचकर होटलों में रुकते हैं छात्र, इस समय होटलों में भी कामकाज प्रभावित, कैसे परीक्षा देंगे छात्र
  • कांग्रेस, आप, टीएमसी सहित अनेक दल इस समय परीक्षा कराने के विरोध में, ममता बनर्जी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट जाएं राज्य
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NSUI JEE NEET Exam Protest - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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यूपी-बिहार, उत्तराखंड और असम जैसे राज्य बाढ़ की भयंकर परेशानी से जूझ रहे हैं। बाढ़ से करोड़ों की आबादी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। कोरोना संक्रमण रोज नये कीर्तिमान बनाने पर तुला हुआ है। इसी माहौल में केंद्र सरकार NEET और JEE परीक्षाएं आयोजित करा रही है। इन परीक्षाओं के सेंटर झारखंड जैसे राज्यों के अनेक जिलों से 500-500 किलोमीटर की दूरी पर हैं। इस दौरान बसों-ट्रेनों का परिचालन भी बंद है। ऐसे में इन सेंटरों तक गरीब छात्र कैसे पहुंचेंगे, यह बड़ा सवाल है। यही कारण है कि देशभर के लाखों छात्र ऐसे समय में परीक्षाओं को आयोजित कराने का विरोध कर रहे हैं।   

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कांग्रेस नेता और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने अमर उजाला को बताया कि झारखंड जैसे राज्य में NEET एग्जाम के लिए केवल पांच सेंटर बनाए गए हैं। राज्य के 10 जिले ऐसे हैं जिनसे सबसे नजदीकी NEET एग्जाम सेंटर की दूरी 500 किलोमीटर से ज्यादा है। इस समय ट्रेन या बसों का परिचालन भी बंद है। ऐसे में अमीर छात्र तो निजी वाहनों से इन सेंटरों तक पहुंच जाएंगे, लेकिन गरीब छात्र कैसे पहुंच पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस काल में इन परीक्षाओं को आयोजित कराने का फैसला छात्रों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करना है।
 
आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि बिहार की लगभग 80 लाख आबादी इस समय बाढ़ की भयंकर परेशानी झेल रही है। लोगों के पास खाने-रहने तक की जगह नहीं रह गई है। ऐसे समय में NEET परीक्षाओं को कराने का मतलब इन क्षेत्रों के लाखों गरीब बच्चों को इस परीक्षा से वंचित रखना है। सरकार को इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।

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होटलों में कैसे रुकेंगे  

इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने भी इन परीक्षाओं को लेकर विरोध जताया है तो एनएसयूआई (NSUI) कार्यकर्ता परीक्षाओं को टालने तक के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने कहा कि जहां भी परीक्षाएं होती हैं, छात्र उन जगहों पर एक दिन पहले  पहुंचकर किसी होटल में ठहरते हैं और अगले दिन फ्रेश होकर परीक्षाएं देते हैं। लेकिन अनेक जगहों पर अभी भी होटल नहीं चल रहे हैं। जिन जगहों पर होटल हैं, वहां कोरोना संक्रमण से बचाव के कोई पुख्ता उपाय नहीं हैं। ऐसे में सरकार को परीक्षाओं को आयोजित करने से बचना चाहिए।  
 
हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि अभिभावक और छात्र NEET, JEE परीक्षाओं को कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि परीक्षाओं के दौरान छात्रों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। छात्र हाथ धुलकर ही परीक्षा भवन में जाएंगे। परीक्षा के दौरान छात्रों को ग्लव्स और सैनिटाइजर दिए जाएंगे जिससे किसी छात्र को कोरोना संक्रमण न हो सके।

कई दल विरोध में

सुप्रीम कोर्ट की सहमति के बाद केंद्र सरकार ने NEET और JEE परीक्षाओं को आयोजित कराने का फैसला लिया है, लेकिन विपक्षी दल इसे छात्र विरोधी निर्णय बताते हुए परीक्षाओं को कैंसल कराने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी शुरू से इसके विरोध में रहे हैं तो बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इसे कैंसल कराने की मांग की।

सोनिया गांधी के साथ हुई बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि NEET और JEE परीक्षाओं को रद्द कराने के लिए राज्यों को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी कहा है कि आज अचानक 28 लाख छात्रों को कोरोना संक्रमण से बचाने की बात संभव नहीं है। केंद्र सरकार को परीक्षाओं को टालना चाहिए या इसका कोई विकल्प राज्यों को दे देना चाहिए।
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यह हो सकता है विकल्प

गौरव वल्लभ ने कहा कि उन्होंने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कुछ उपाय बताए हैं, जिसके जरिए इस समस्या का विकल्प पाया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि केंद्र को राज्य सरकारों के साथ बैठकर लॉजिस्टिक्स की समस्या सुलझानी चाहिए। आवश्यक है कि परीक्षा को कुछ समय के लिए टाल देना चाहिए। अब तक छह महीने की पढ़ाई का नुकसान हो चुका है। इसे देखते हुए एक नया सिलेबस डिजाइन कर नुकसान को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।
 
दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल के सदस्य कहते हैं कि हर चीज का राष्ट्रीय स्तर पर एकीकरण का प्रयास समस्याएं पैदा कर रहा है। NEET और JEE के संदर्भ में भी इसे देखा जा सकता है। आवश्यकता है कि कम से कम इस साल के लिए ये परीक्षाएं राज्यों के स्तर पर छोड़ देनी चाहिए, जिससे वे अपनी स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर सभी छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षाएं आयोजित करवा सकें।
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