किसी भी त्रासदी में सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं और बच्चों को उठाना पड़ता है। कोरोना का असर भी बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। बच्चों के हित में काम करने वाली संस्था लॉरेट्स एंड लीडर्स का कहना है कि कोरोना के कारण बच्चों को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए और उन्हें सुरक्षा देने के लिए दुनिया भर की सरकारों को उदारता से पेश आना चाहिए।
संस्था का अनुमान है कि बच्चों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर एक लाख करोड़ डॉलर की मदद दिए जाने की जरुरत है।
संस्था के संस्थापक सदस्य नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को दो भागों में बांटकर रख दिया है। कोरोना का सबसे ज्यादा असर समाज के सबसे कमजोर तबकों पर दिखाई पड़ रहा है और आने वाले समय में भी यह लगातार जारी रहेगा।
संस्था की तरफ से सोमवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि अगर ऐसे समय में बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाया जाता है तो इस महामारी के बाद उपजी परिस्थितियों में बच्चों को बेचने, उनके साथ यौनाचार करने और हिंसात्मक गतिविधियों में वृद्धि हो जाएगी।
इसे बच्चों को अपने स्कूल छोड़ने पड़ेंगे जिसका भविष्य में बहुत नकारात्मक असर दिखाई पड़ेगा। इस आह्वान को दलाई लामा, डेसमंड टूटू, केरी कैनेडी, गाय राइडर और मैरी रॉबिंसन जैसी हस्तियों का समर्थन हासिल है।