महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत शुरू की गई मनरेगा योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने इस योजना के तहत आने वाले करीब एक करोड़ फर्जी 'जॉब कार्ड' रद्द कर दिए हैं। रोजगार गारंटी प्रोग्राम बड़ी मात्रा में फंड रिसाव का स्त्रोत है।
आपको बता दें कि इसके तहत सरकार ग्रामीण आबादी के हर परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी कार्ड के जरिये रोजगार सुनिश्चित कराती है। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना से जुड़े लाभार्थियों की संख्या 31 लाख से अधिक थी, जिसमें से 9.3 लाख फर्जी जॉब कार्डों को रद्द कर दिया गया है।
बता दें कि 2014 में आयी नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को दूर करने के वादे के साथ सत्ता में काबिज हुई थी। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि सामाजिक योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिल सके। इसी वजह से सरकार भ्रष्टाचार का दायरा कम करने में लगी है। सरकार ने इसीलिए एलपीजी सब्सिडी और स्कूल के दोपहर भोजन को आधार के साथ जोड़ा है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल लाभार्थियों को ही मिले।
अधिकारियों ने कहा कि मनरेगा योजना में बड़ी धांधली को मद्देनजर रखते हुए इससे भ्रष्टाचार को दूर करने की आवश्यकता महसूस की गई, क्योकिं इस योजना में बड़े पैमाने पर कई राज्यों में पैसे की गफलत की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मोदी सरकार योजना में पारदर्शिता चाहती है। बता दें कि सबसे ज्यादा फर्जी जॉब कार्ड 21.67 लाख भाजपा शासित मध्य प्रदेश में रद्द किए गए हैं, इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 19.4 लाख कार्ड रद्द किए गए थे। हालांकि देश के बड़े राज्यों में से एक तेलंगाना राज्य में फर्जी जॉब कार्ड नहीं मिले हैं।