ओडिशा के बालासोर में हुए भयानक ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना में लोगों की मौत पर दुनियाभर के लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं। ऐसी किसी आपात स्थिति में एनडीआरएफ की काफी सक्रिय भूमिका रहती है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने शनिवार को कहा कि उनके कर्मियों ने 44 यात्रियों को जीवित निकाला यात्री ट्रेनों के क्षतिग्रस्त डिब्बों से और 112 शव निकाले गए।
एनडीआरएफ ने कहा कि उसके कर्मी अन्य एजेंसियों की मदद से अंतिम दौर की खोज कर रहे हैं। एनडीआरएफ ने ट्वीट किया कि 44 जीवित पीड़ितों को बचाने और अब तक 112 शवों को निकालने के बाद, एनडीआरएफ की टीमें अन्य एजेंसियों के साथ अंतिम खोज कर रही हैं।
इस बीच, रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने शनिवार को बताया कि दुर्घटना के कारण कुल 58 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, 81 को डायवर्ट किया गया है और 10 को टर्मिनेट किया गया है। बहाली कार्य को लेकर बोले कि काम पूरे जोरों पर चल रहा है और वे पहले डाउनलाइन पर सेवाओं की बहाली सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे।
कोई नौकरी के लिए निकला तो कोई लौट रहा था अपने घर
हादसे की शिकार हुईं दोनों ट्रेनों में कोई नौकरी करने चेन्नई जा रहा था तो कोई हावड़ा अपने घर जा रहा था। शालीमार चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल सफर एक्सप्रेस ट्रेन ने 200 किमी से कुछ अधिक सफर तक किया होगा कि ये हादसे का शिकार हो गई। यह ट्रेन कोलकाता से दोपहर करीब साढ़े तीन बजे चली थी। इस ट्रेन को शनिवार शाम चेन्नई पहुंचना था।
चार राज्यों से गुजरने वाली ये ट्रेन पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर गुजरती है। ये ट्रेन 16 जगहों पर रुकती है। हादसे के वक्त ट्रेन भद्रक जा रही थी। वहीं, बंगलुरू-हावड़ा सफर एक्सप्रेस बृहस्पतिवार सुबह बंगलूरू से चली थी। इसे शुक्रवार रात हावड़ा पहुंचना था। यह ट्रेन 1962 किमी का सफर तय करती है।
ये ट्रेन कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है।ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे में पश्चिम बंगाल के कम से कम 35 यात्रियों की जान गई है और 544 घायल हुए हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया घायल चिकित्सा सहायता का जायजा लेने के लिए रविवार को एम्स भुवनेश्वर और कटक में मेडिकल कॉलेज का दौरा करेंगे।