दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पीड़िता की कुंडली की रिपोर्ट मांगने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा, यह समझ नहीं आ रहा कि इस मामले में इससे क्या मतलब है कि दुष्कर्म पीड़िता मांगलिक है या नहीं।
यह निजता के अिधकार का हनन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम केस के गुण दोष में नहीं जा रहे, पर और भी कई पहलू हैं। निजता के अधिकार का भी उल्लंघन किया गया है। ज्योतिष विज्ञान है, इसमें संदेह नहीं। हम सबका सम्मान करते हैं। पर संदर्भ यह नहीं है।
गुण दोष पर सुनवाई करे हाईकोर्ट
शीर्ष कोर्ट ने शिकायतकर्ता, आरोपी व यूपी सरकार को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वह इस मामले में मेरिट के आधार पर आरोपी की जमानत पर सुनवाई करे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।
यह था मामला
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शादी का वादा कर दुष्कर्म करने के आरोपी गोबिंद राय उर्फ मोनू की जमानत पर सुनवाई के दौरान आदेश दिया था। आरोपी के वकील ने दावा किया था कि लड़की मांगलिक है, इसलिए दोनों की शादी नहीं हो सकती। जबकि, लड़की के वकील ने इसे गलत बताया था।
n हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से 10 दिन के भीतर अपनी-अपनी कुंडली देने का निर्देश दिया था। विभागाध्यक्ष से कहा था कि कुंडली की जांच कर तीन हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दें कि लड़की मांगलिक है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 26 जून तक के लिए स्थगित कर दी थी।