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Delhi: हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, पूछा- दुष्कर्म पीड़िता के मांगलिक होने या न होने से क्या फर्क

Sun, 04 Jun 2023 06:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

शीर्ष अदालत ने कहा, यह समझ नहीं आ रहा कि इस मामले में इससे क्या मतलब है कि दुष्कर्म पीड़िता मांगलिक है या नहीं। हाईकोर्ट ने इस मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष से जानकारी मांगी थी। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने शनिवार को मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए 23 मई के हाईकोर्ट के आदेश को निलंबित कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पीड़िता की कुंडली की रिपोर्ट मांगने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा, यह समझ नहीं आ रहा कि इस मामले में इससे क्या मतलब है कि दुष्कर्म पीड़िता मांगलिक है या नहीं।

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हाईकोर्ट ने इस मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष से जानकारी मांगी थी। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने शनिवार को मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए 23 मई के हाईकोर्ट के आदेश को निलंबित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को विशेष सुनवाई करते हुए कहा, हाईकोर्ट का आदेश पूरी तरह से संदर्भ से बाहर है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने कहा, मिस्टर मेहता, आपने यह देखा है? इस पर मेहता ने कहा, मैंने यह देखा है। हाईकोर्ट का आदेश बहुत परेशान करने वाला है, इस पर रोक लगाई जा सकती है।

मांगलिक-गैर मांगलिक का विवाह माना जाता है अशुभ
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, मंगल ग्रह (मंगल) के प्रभाव में पैदा हुए व्यक्ति को मंगल दोष होता है और इसे मांगलिक कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मांगलिक और गैर-मांगलिक के बीच विवाह अशुभ है और यह विनाशकारी हो सकता है।
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क्या कोर्ट दे सकता है ऐसा आदेश
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, सवाल यह नहीं है कि किसी महिला या पुरुष के मांगलिक दोष को तय किया जा सकता है या नहीं, ज्योतिष भी एक विज्ञान है। सवाल यह है कि क्या कोर्ट इस प्रकार के मामलों में ऐसा आदेश दे सकता है?

  • शीर्ष कोर्ट इस सवाल का जवाब तलाशेगा व तय करेगा कि क्या कोई अदालत कुंडली की जांच का आदेश दे सकती है?

यह निजता के अिधकार का हनन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम केस के गुण दोष में नहीं जा रहे, पर और भी कई पहलू हैं। निजता के अधिकार का भी उल्लंघन किया गया है। ज्योतिष विज्ञान है, इसमें संदेह नहीं। हम सबका सम्मान करते हैं। पर संदर्भ यह नहीं है।

गुण दोष पर सुनवाई करे हाईकोर्ट
शीर्ष कोर्ट ने शिकायतकर्ता, आरोपी व यूपी सरकार को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वह इस मामले में मेरिट के आधार पर आरोपी की जमानत पर सुनवाई करे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

यह था मामला
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शादी का वादा कर दुष्कर्म करने के आरोपी गोबिंद राय उर्फ मोनू की जमानत पर सुनवाई के दौरान आदेश दिया था। आरोपी के वकील ने दावा किया था कि लड़की मांगलिक है, इसलिए दोनों की शादी नहीं हो सकती। जबकि, लड़की के वकील ने इसे गलत बताया था। 

n हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से 10 दिन के भीतर अपनी-अपनी कुंडली देने का निर्देश दिया था। विभागाध्यक्ष से कहा था कि कुंडली की जांच कर तीन हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दें कि लड़की मांगलिक है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 26 जून तक के लिए स्थगित कर दी थी।

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