दरअसल, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सहयोगी दलों की अहम भूमिका हैं। इनमें टीडीपी, जेडीयू, शिवसेना (शिंदे गुट) और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन चार पार्टियों के मिलाकर 40 सांसद हैं। टीडीपी और जेडीयू अपने लिए मनपसंद मंत्रालय चाहती हैं। हर दल चार सांसद पर एक मंत्री की डिमांड कर रहे हैं। इस लिहाज से टीडीपी चार, जेडीयू तीन, शिवसेना और चिराग पासवान दो-दो मंत्रालय की उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा टीडीपी लोकसभा अध्यक्ष का पद भी चाहती है, हालांकि, भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। भाजपा इसके बदले में टीडीपी को लोकसभा उपाध्यक्ष का पद दे सकती हैं। पिछली सरकार में यह पद खाली था। जेडीयू के पास अभी राज्यसभा में उपसभापति का पद है।
सूत्रों का कहना है कि जेडीयू की नजर रेलवे-कृषि मंत्रालय के साथ बिहार के लिए विशेष पैकेज पर है। टीडीपी ने 5 मंत्रालयों और लोकसभा स्पीकर पद की मांग रखी है। इनमें ग्रामीण विकास, आवास और शहरी मामले, बंदरगाह और शिपिंग, सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जल शक्ति मंत्रालय शामिल हैं। टीडीपी वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी मांग रही है। आंध्र प्रदेश में फ्री की योजनाओं के चलते आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। इसलिए नायडू चाहते हैं कि वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार उन्हें मिले।
दरअसल, केंद्र सरकार के 10 सबसे ताकतवर और समृद्ध मंत्रालय में गृह, रक्षा, वित्त, विदेश, रेलवे, सूचना प्रसारण, शिक्षा, कृषि, सड़क परिवहन और नागरिक उड्डयन शामिल हैं। 2019 और 2014 में अकेले बहुमत होने से भाजपा ने यह सभी बड़े महकमें अपने पास रखे थे। लेकिन 2024 में स्थिति बदली हुई हैं। बावजूद इसके भाजपा किसी भी स्थिति में रक्षा, वित्त, गृह, विदेश, रेलवे और सूचना प्रसारण मंत्रालय किसी भी सहयोगी दल को देने के मूड में नहीं है। ऐसे में भाजपा को बदली हुई परिस्थितियों और गठबंधन के सहयोगी को ध्यान में रखते हुए मंत्री बनाने होंगे। इसका सीधा मतलब होगा कि मोदी सरकार 3.0 में भाजपा के मंत्रियों की संख्या पिछले दो सरकार की तुलना में कम होगी। जबकि सहयोगी दलों के मंत्रियों की संख्या बढ़ेगी।
भाजपा पंचायती राज्य और ग्रामीण विकास जैसे मंत्रालय जेडीयू को दे सकती है। इसके अलावा नागरिक उड्डयन, स्टील जैसे मंत्रालय टीडीपी को दे सकती है। भारी उद्योग शिवसेना शिंदे गुट को मिल सकता है। इसके अलावा महत्वपूर्ण मंत्रालयों जैसे वित्त, रक्षा में सहयोगियों दलों को राज्य मंत्री पद दिया जा सकता है। पर्यटन, एमएसएमई, स्किल डेवलपमेंट, साइंस टेक्नॉलॉजी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता जैसे मंत्रालय भी भाजपा सहयोगी दलों को दे सकती है।
मोदी सरकार 3.0 में भी भाजपा गरीब कल्याण, युवा-कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम मंत्रालय अपने पास ही रखना चाहेगी। क्योंकि यह चारों मंत्रालय पीएम मोदी द्वारा बताई गई चार जातियों गरीब, महिला, युवा और किसान के लिए योजनाओं को लागू करने के लिए बेहद अहम हैं। मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यालय में रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इन मंत्रालय के जरिए देश में कई बडे सुधार कार्य किए है। आम आदमी से जुड़े इस मंत्रालय को भाजपा अन्य किसी सहयोगी को देकर सुधार की रफ्तार धीमी नहीं करना चाहेगी।
पिछले दो कार्यकाल में भाजपा ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात, खाद्य, जन वितरण और उपभोक्ता मामले जैसे अहम मंत्रालय सहयोगी दलों को दिए हैं। टीडीपी के पास नागरिक उड्डयन, रामविलास पासवान के पास खाद्य, जन वितरण एवं उपभोक्ता मामले, शिवसेना के पास भारी उद्योग और अकाली दल के पास खाद्य प्रसंस्करण जैसा मंत्रालय रहा।
भाजपा को बहुमत नहीं, 14 सहयोगी दलों के 53 सांसदों का समर्थन
लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली हैं। यह बहुमत के आंकड़े (272) से 32 सीटें कम हैं। हालांकि एनडीए ने 292 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया। एनडीए में भाजपा के अलावा 14 सहयोगी दलों के 53 सांसद हैं। गठबंधन में चंद्रबाबू की टीडीपी 16 सीटों के साथ दूसरी और नीतीश की जेडीयू 12 सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। दोनों ही पार्टियां इस वक्त भाजपा के लिए जरूरी हैं। इनके बिना भाजपा का सरकार बनाना मुश्किल है।