राष्ट्रीय महिला आयोग ने बालुरघाट एक्सप्रेस में एक महिला से कथित तौर पर छेड़छाड़ मामले में पुलिस से मामला दर्ज करने की मांग की है। महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर के हवाले से आयोग ने छेड़छाड़ और चोरीछिपे उसकी रिकॉर्डिंग करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। आयोग ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह कृत्य गलत ताक-झांक के समान है और इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत ही निपटा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय महिला आयोग के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता की निजी जानकारी भी ऑनलाइन सार्वजनिक रूप से साझा की। आयोग ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि मामले में एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) अधिनियम, 2023 की धारा 77 (ताक-झांक से संबंधित) के साथ-साथ उसी अधिनियम की धारा 75 और 79 को भी शामिल किया जाए। आयोग ने आरोपी पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66ई, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से निजता के उल्लंघन को परिभाषित की है, लगाने की भी मांग की गई है।
एनसीडब्ल्यू ने रिपोर्ट का संज्ञान लिया
इससे पहले एनसीडब्ल्यू ने उन रिपोर्टों का संज्ञान लिया, जिनमें आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक एक्सप्रेस ट्रेन में एक महिला यात्री को परेशान किया गया और मोबाइल फोन से गुप्त रूप से उसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया। घटना कथित तौर पर 5 मार्च को हुई, जब महिला बालुरघाट एक्सप्रेस से यात्रा कर रही थी।
इन धाराओं के तहत दर्ज हो मामला
एनसीडब्ल्यू ने फेसबुक पर कहा, 'आयोग ने प्रथम दृष्टया पाया है कि यह कृत्य वॉयरिज्म के अंतर्गत आता है, जो बीएनएस अधिनियम, 2023 की धारा 77 के साथ-साथ बीएनएस अधिनियम, 2023 की धारा 75, 79 और आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 66ई के तहत दंडनीय है।' बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 75 और 79 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए अपराध के लिए लगाई जाती है। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि एफआईआर में इन धाराओं को सम्मिलित किया जाना चाहिए।
सुकांत मजूमदार ने की पीड़िता से बात
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कॉलेज छात्रा होने का दावा करने वाली महिला को फोन किया और उसे जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर सुरक्षा मांगने को कहा। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि महिला की पहचान कथित तौर पर ऑनलाइन साझा की गई है, जिसके कारण उसे धमकियां मिल रही हैं।