भारत में पिछले साल ‘राष्ट्र के खिलाफ अपराध’ में गिरावट आई है। इस दौरान राजद्रोह, शासकीय गोपनीयता अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के उल्लंघन समेत कुल 5,164 मामले दर्ज हुए। यानी देश में हर दिन ऐसे 14 अपराध हुए। इससे पहले, इस श्रेणी में 2020 में 5,613 और 2019 में 7,656 मामले दर्ज किए गए थे।
यह जानकारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की भारत में अपराध-2021 रिपोर्ट में सामने आई है। इसके मुताबिक, 2021 में 5,164 के अलावा, पहले से लंबित 8,600 मामलों की जांच आगे बढ़ाई गई और तीन मामलों को जांच के लिए फिर से दोबारा खोला गया। इस तरह पिछले साल इन अपराधों के लंबित मामलों की कुल संख्या बढ़कर 13,767 हो गई।
यूपी में 1,862 तो तमिलनाडु में 654 मामले
n राष्ट्र के खिलाफ अपराध के सर्वाधिक 1,862 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जो 2020 में 2,217 और 2019 में 2,107 थे।
nयूपी के बाद तमिलनाडु (654), असम (327), जम्मू-कश्मीर (313) और पश्चिम बंगाल (274) का स्थान रहा और दिल्ली में ऐसे 18 मामले सामने आए। देशभर में इनमें आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की दर 78% रही।
यूपी में राजद्रोह के तीन मामले
राजद्रोह के सबसे ज्यादा मामले आंध्र प्रदेश (29) में इसके बाद मणिपुर व नगालैंड (सात-सात), हरियाणा (पांच), दिल्ली (चार) व यूपी तथा असम (तीन-तीन) में दर्ज किए गए।
जम्मू-कश्मीर में यूएपीए के सर्वाधिक केस
यूएपीए के सबसे ज्यादा के जम्मू-कश्मीर (289) में मिले। इसके बाद मणिपुर (157), असम (95), झारखंड (86), यूपी (83) और दिल्ली (5) का नंबर रहा।