भारत में किसानों और खेतिहर मजदूरों के बीच आत्महत्या का संकट वर्ष 2024 में भी गंभीर बना रहा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के 2024 में कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 10,546 लोगों ने जान दी थी। यह संख्या 2023 के 10,786 मामलों की तुलना में थोड़ी कम जरूर है, लेकिन देश में औसतन हर दिन लगभग 28 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। यानी भारत में अब भी हर घंटे एक किसान या खेतिहर मजदूर अपनी जान दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, कृषि से जुड़ी आत्महत्याएं देश में दर्ज कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का 6.2 प्रतिशत रहीं। रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि आत्महत्या करने वालों में खेतिहर मजदूरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। 10,546 लोगों में 5,913 कृषि मजदूर थे, जो कुल मामलों का 56% है। वर्ष 2020 में कृषि मजदूरों की हिस्सेदारी 47.75% थी, लेकिन उसके बाद से यह लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ लंबे समय से यह संकेत देते रहे हैं कि ग्रामीण परिवारों की आय में खेती से मिलने वाली कमाई की तुलना में मजदूरी पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, जिससे आर्थिक असुरक्षा और गहरी हुई है।
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साल 2022 में सबसे ज्यादा किसानों ने दी जान
वर्ष 2022 में कृषि क्षेत्र में आत्महत्याओं का आंकड़ा 11,290 तक पहुंच गया था, जो पिछले वर्षों में सबसे अधिक था। उसके बाद लगातार गिरावट दर्ज हुई है, लेकिन मौजूदा संख्या यह बताती है कि जमीनी हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
महाराष्ट्र सबसे अधिक मामले, यूपी में कम
महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र से जुड़ी आत्महत्याओं के सबसे अधिक 3,824 मामले दर्ज किए गए। यह देश में कृषि क्षेत्र की कुल आत्महत्याओं का 36.26 प्रतिशत हिस्सा है । दूसरे नंबर पर कर्नाटक है जहां 2,971 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 835, आंध्र प्रदेश में 780, तमिलनाडु में 503 और छत्तीसगढ़ में 486 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में कृषि आत्महत्याओं की संख्या महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की तुलना में काफी कम दर्ज की गई।
कर्नाटक में सबसे तेज वृद्धि, आंध्र प्रदेश में कमी
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में आत्महत्याओं में सबसे अधिक वृद्धि कर्नाटक में दर्ज की गई, जहां मामलों में 2023 की तुलना में 22.61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद राजस्थान में 14 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 7.46 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, आंध्र प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़ी आत्महत्याओं में 15.67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पुदुचेरी में तीन गुना से अधिक उछाल...पुडुचेरी में 2019 से 2022 तक कृषि क्षेत्र में आत्महत्या का कोई मामला दर्ज नहीं था। लेकिन 2023 में 10 मामले सामने आए और 2024 में यह संख्या बढ़कर 33 हो गई।
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