एनसीआरबी की रिपोर्ट (फाइल फोटो)
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देश में होने वाली आत्महत्या की घटनाओं को लेकर राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जवाब पेश किया। मंत्रालय की ओर बताया गया कि देश में 2018, 2019 और 2020 में कुल 9,140 लोगों ने बेरोजगारी की वजह से खुद को मौत के घाट उतार लिया। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि इन तीन साल में दिवालियेपन या कर्ज के कारण आत्महत्या करने वालों की संख्या 16,091 थी।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि मानसिक विकारों के बोझ को दूर करने के लिए सरकार राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) को लागू कर रही है। इसके साथ ही देश के 692 जिलों में एनएमएचपी के तहत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) के कार्यान्वयन को भी पूरा समर्थन दिया जा रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या रोकथाम सेवाएं, कार्यस्थल तनाव प्रबंधन, जीवन कौशल प्रशिक्षण और स्कूलों और कॉलेजों में परामर्श प्रदान करना है। इसके जरिए रोकथाम, पदोन्नति और दीर्घकालिक निरंतर देखभाल सहित मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और सामुदायिक जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही इसका मकसद मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के सकारात्मक परिणाम को लेकर लोगों की भागीदारी को बढ़ाना भी है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि उसने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना जैसे रोजगार और आय सृजन कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिसका उद्देश्य नियोक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा लाभ और रोजगार की बहाली के साथ नए रोजगार के सृजन के लिए प्रोत्साहित करना है। द नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) प्रोजेक्ट नाम का एक अन्य कार्यक्रम नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं के लिए चलाया गया है।
संसद के 2022 का बजट सत्र 31 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ था। बजट सत्र का पहला भाग 31 जनवरी से 11 फरवरी तक और दूसरा भाग 14 मार्च से 8 अप्रैल तक चलेगा।