राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कहा कि उसने बिहार के सारण जिले में तीन दिन पहले एक अवैध मदरसा के पास हुए विस्फोट की जांच शुरू की है। विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और एक लड़का घायल हुआ था।
एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, घायल नाबालिग का अभी पटना के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने उसे मामले में आरोपी बनाया है। कानूनगो ने आरोप लगाया कि बुधवार शाम हुए विस्फोट का स्थल मोतीराजगांव में एक अवैध मदरसे के करीब था। जहां बच्चों को बम बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
सारण के पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला ने कहा, घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। इस बात की जांच की जा रही है कि क्या मदरसा बिना अनुमति के संचालित किया जा रहा था। विस्फोट में एक मौलाना (40 वर्षीय) की मौत हो गई थी और एक नाबालिग छात्र घायल हो गया था। एनसीपीसीआर प्रमुख ने बताया कि लड़के की सर्जरी हुई है और उसे पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उन्होंने कहा, मदरसे में बम बनाना या बच्चों को बम बनाना सिखाना, यह एक ऐसा तथ्य है जिसकी पुलिस जांच कर रही है। मदरसे में 15 बच्चे थे और 14 बच्चों को गायब कर दिया गया है। ज्यादातर बच्चे कटिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि मदरसे के प्रमुख और दो अन्य मौलाना फरार हैं।
एनसीपीसीआर प्रमुख ने कहा, हमें बंदूर के छर्रे और नुकीली सुइयां मिलीं, जो एक पॉलिथीन बैग में पैक की गई थीं। जिनका इस्तेमाल देसी बम बनाने में किया गया था। पुलिस को इस संबंध में जब्ती करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह जांच करने का भी निर्देश दिया गया है कि क्या लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए बम बनाए जा रहे थे।