केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) सिर्फ शिकायतों को संबंधित अधिकारियों के पास भेजकर उनके जवाब का इंतजार नहीं कर सकता। उसे बच्चों के अधिकारों के कथित उल्लंघन के मामलों में की गई कार्रवाई की प्रभावी निगरानी भी करनी चाहिए।
यह टिप्पणी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर एक अपील की सुनवाई के दौरान की गई। अपील में कर्नाटक के गुलबर्ग स्थित एक स्कूल में दिव्यांग बच्चों के साथ कथित शारीरिक दुर्व्यवहार की शिकायत से जुड़ी अपडेटेड स्थिति रिपोर्ट और विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट मांगी गई थी।
सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने हाल ही में दिए एक आदेश में कहा कि ये आरोप सुनने और बोलने में दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और शिक्षा के अधिकारों से जुड़े हैं। इसलिए इन पर उचित ध्यान देना और आगे की कार्रवाई करना जरूरी है।
शिकायत में क्या आरोप लगाया गया था?
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि स्कूल के शिक्षक और कर्मचारी विद्यार्थियों के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार करते थे। उनके साथ क्रूर और अमानवीय व्यवहार भी किया जाता था।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि बच्चों को सांकेतिक भाषा में पर्याप्त पढ़ाई नहीं कराई जा रही थी। इससे वे सार्थक शिक्षा और समावेशी शैक्षणिक माहौल से वंचित हो रहे थे।
एनसीपीसीआर ने अब तक क्या कार्रवाई की?
जुलाई 2025 में दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में एनसीपीसीआर ने आवेदक को बताया था कि वह जिला मजिस्ट्रेट की कार्रवाई रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। बाद में दिए गए जवाबों से पता चला कि जिला प्रशासन को इस बारे में कई बार याद दिलाया गया था। इसके अलावा, सितंबर 2026 में कर्नाटक के स्कूल शिक्षा विभाग को भी एक पत्र भेजा गया था। हालांकि, केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि यह पत्र सामान्य प्रकृति का दिखाई देता है। इसमें शिकायत से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से बात नहीं की गई थी।
जांच और कार्रवाई पर आयोग ने क्या सवाल उठाए?
आयोग ने यह भी कहा कि एनसीपीसीआर यह पर्याप्त रूप से नहीं बता पाया कि आरोपों की जांच, निरीक्षण या इस मामले में कोई अन्य ठोस कार्रवाई की गई थी या नहीं। आयोग ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने की जिम्मेदारी निभाने वाली यह वैधानिक संस्था है। इसलिए उससे उम्मीद की जाती है कि वह शिकायतों पर पूरी गंभीरता से कार्रवाई करे और आगे की उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करे।
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आयोग ने एनसीपीसीआर को क्या निर्देश दिया?
आदेश में कहा गया, उसकी भूमिका सिर्फ शिकायतों को आगे भेजने और जवाबों का इंतजार करने तक सीमित नहीं हो सकती। उसे उन पर की गई कार्रवाई की प्रभावी निगरानी भी करनी चाहिए। केंद्रीय सूचना आयोग ने यह भी कहा कि भले ही यह कार्यवाही सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी देने से संबंधित थी, लेकिन “मूल शिकायत की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने एनसीपीसीआर के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी को निर्देश दिया कि वह अपडेट जानकारी के साथ हर बिंदु का अलग-अलग जवाब दे। साथ ही, की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। इनमें निरीक्षण रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट या कार्रवाई रिपोर्ट शामिल हैं। यदि कोई जांच या निरीक्षण नहीं किया गया है या कार्रवाई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, तो आवेदक को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।