ईवीएम पर सबसे ज्यादा सवाल उठाने वाली आम आदमी पार्टी अब चुनाव आयोग की चुनौती स्वीकार करने से पीछे हट गई है। पार्टी ने ईवीएम के मदर बोर्ड में बदलाव करने की इजाजत नहीं मिलने पर हैकाथॉन में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
पार्टी ने मौजूदा स्वरूप में हैकाथॉन को एक प्रदर्शनी करार दिया है। इस मामले में सिर्फ शरद पवार की एनसीपी और माकपा ने आयोग की चुनौती को स्वीकार किया है। बसपा, कांग्रेस, सपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी चुनौती लेने से हाथ खड़े कर दिए।
इस चैलेंज में भाग लेने के लिए नाम भेजने की अंतिम तारीख शुक्रवार थी। आयोग ने 3 जून को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ईवीएम में छेड़छाड़ साबित करने का कार्यक्रम तय किया है।
एनसीपी ने अपने तीन प्रतिनिधियों को ईवीएम चैलेंज में भाग लेने के लिए नामित किया है। पार्टी ने चुनाव आयोग के चैलेंज के लिए बनाए गए फ्रेमवर्क के तहत किसी खास ईवीएम को नहीं चुना है, बल्कि इसका फैसला चुनाव आयोग पर ही छोड़ दिया है।
जबकि देर शाम आयोग ने कहा कि माकपा दूसरी पार्टी है, जिसने ईवीएम हैक करने की चुनौती को स्वीकार किया। चुनाव आयोग हाल में संपन्न पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुए ईवीएम को चैलेंज के लिए लाएगा। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी और बसपा ने प्रमुखता से ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।
आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय में मीडिया को बताया कि आयोग की इज्जत करने के बावजूद यह कहना पड़ रहा है कि हैकाथॉन के नाम पर आयोग एक प्रदर्शनी करवा रहा है।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने तो इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुला लिया था और विधानसभा में ही मशीन को हैक करने का लाइव शो दिखाया गया। पार्टी ने शुक्रवार को ईवीएम चैलेंज के लिए तय किए गए आयोग के मानदंड पर असहमति जताई।
वहीं आप और कांग्रेस ने पत्र लिख कर कहा है कि चुनाव आयोग ईवीएम में बिना रोक-टोक के हैकाथन कराने से क्यों भाग रहा है। जबकि भाकपा, भाजपा और रालोद ने चैलेंज को सिर्फ देखने में रुचि दिखाई है।