राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से प्ले स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है, जिसके मुताबिक बच्चों की पढ़ाई के बजाय उनके व्यवहार पर ध्यान दिया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक टीचर बच्चों की रोज की छोटी से छोटी आदत पर नजर बनाए रखेंगे, जैसे उनके अंदर शेरयरिंग-केयरिंग भावनाएं है या नहीं। बच्चे अपने सामान का ख्याल रख पाते हैं या नहीं, बच्चा दिए जाने वाले स्टडी मैटेरियल का कैसे इस्तेमाल करता है?
साथ पढ़ने वाले सहपाठियों के प्रति उसका व्यवहार कैसा है, वह उनसे लड़ता-झगड़ता तो नहीं है। बच्चा अपनी पेंसिल, कलर्स वगैरह अपने साथियों को इस्तेमाल करने देता है कि नहीं? जल्दी गुस्सा तो नहीं होता? स्कूल आने पर बच्चा ज्यादा चिड़चिड़ाता तो नहीं है? टीचर के दिए टास्क को लेकर, होमवर्क में और लर्निंग में बच्चा कितना एक्टिव है?
टीचर्स को बच्चों की आदतों के आधार पर रिपोर्ट कार्ड तैयार करनी होगी।
बदलाव का कारण है ये
दरअसल, आजकल बच्चों के व्यवहार की बेहतर नींव के बजाय उनकी पढ़ाई पर ज्यादा जोर दिया जाता है।खास बात है कि इस कदम से मासूमों पर पढ़ाई के बोझ को कम किया जा सकेगा। एनसीईआरटी का कहना है कि बच्चों पर पढ़ाई बोझ ज्यादा डाला जा रहा है।
एनसीईआरटी की जारी ड्राफ्ट में लिखा गया है कि टीचर बच्चों के व्यवहार पर नजर बनाए रखें और रोज इस संदर्भ में नोट तैयार करें। बच्चों के माता-पिता को भी इसकी रोज जानकारी दी जाएगी। टीचर को बच्चे की हर हरकत पर पैनी नजर बनाए रखनी होगी फिर वह चाहे पेंसिल पकड़ना ही क्यों न हो?