केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों से कई संदर्भों-अंशों को हटाने को लेकर जारी विवाद पर सफाई दी है। एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलाव का बचाव करते हुए शिक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि एनसीईआरटी ने अपने पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाने के लिए 25 बाहरी विशेषज्ञों और सीबीएसई के 16 शिक्षकों से परामर्श किया। जिसके आधार पर मुगलों, महात्मा गांधी, उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे, हिंदू चरमपंथियों और 2002 के गुजरात दंगों के संबंधित संदर्भ स्कूली पाठ्यपुस्तकों से हटा दिए गए।
गौरतलब है कि एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों से कई संदर्भों और अंशों को हटाने पर विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सोची-समझी साजिश के तहत स्कूली पाठ्यपुस्तकों से इतिहास के कुछ संदर्भों को हटाने का आरोप लगाया है। हालांकि सरकार का कहना है कि पाठ्यक्रम को तार्किक बनाने के उद्देश्य से कुछ बदलाव किए गए हैं। केंद्र का कहना है कि एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में संसोधन विशेषज्ञों की सिफारिशों पर आधारित थे। सरकार का यह भी कहना है कि 2024 में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा लागू होगी, इसके मद्देनजर पाठ्यपुस्तकें संशोधित की जा रही हैं।
इससे पहले शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा था कि आंतरिक विशेषज्ञों के अलावा, एनसीईआरटी ने व्यापक परामर्श के लिए अनुसंधान, विकास, प्रशिक्षण और विस्तार से संबंधित अपनी सभी गतिविधियों में विश्वविद्यालयों और संगठनों के विषय विशेषज्ञों और शिक्षकों से सुझाव मांगे हैं।