एक तरफ जहां सरकार नक्सलियों का सफाया करने के लिए अभियान चला रही है वहीं नक्सली नए-नए हथियार बनाने में लगे हुए हैं। इनमें एक रैंबो तीर है जिसे कि सिल्वेस्टर स्टालिन ने मशहूर किया था। यह तीर नक्सलियों में काफी लोकप्रिय हो रहा है और यह इन विस्फोटक तीरों का इस्तेमाल सुरक्षा कर्मियों का ध्यान भटकाने के लिए करते हैं। इसके अलावा उन्होंने मानव मल में लिपटे हुए बम भी शामिल हैं। ओरिजनल तीर पहले स्टील से बने होते थे और यह एक चॉपर तक को गिरा सकते थे। मगर अब जिस तीर का इस्तेमाल नक्सली कर रहे हैं वह कम विस्फोटक होने के साथ ही बहुत ज्यादा गर्मी और धुआं निकलता है जो कि सुरक्षा कर्मियों को चकमा देने के लिए काफी है। यह खुलासा गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में किया गया है।
गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार- तीर के ऊपरी हिस्से में बेहद कम ताकत वाला गनपाउडर या फिर फायरक्रैकर पाउडर होता है जो अपने लक्ष्य से टकराते ही फट जाता है। यह ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता है लेकिन सुरक्षाबलों को चकमा देने के लिए काफी है। इस रिपोर्ट की कुछ अफसरों ने पुष्टि करते हुए कहा है कि
माओवादी इन दिनों बड़ी संख्या में खतरनाक विस्फोटकों की जगह इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जो कम नुकसान पहुंचाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते साल 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने इसी तकनीक से हमला किया था, जिसमें सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे और उनके हथियार भी लूट लिए गए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रैंबों तीर के अलावा माओवादियों ने पहले से बेहतर मोर्टार और रॉकेट भी विकसित कर लिए हैं। माओवादियों ने क्रूड बम को छिपाने का भी एक स्मार्ट तरीका खोज निकाला है। अब इन बमों को जानवर के मल में छिपा दिया जाता है ताकि सुरक्षा टीमों के खोजी कुत्ते भी इसे सूंघ कर पता न लगा सकें। सीआरपीएफ के दो कुत्ते जिनके नाम ओसामा हंटर्स था उनकी पिछले साल माओवादियों द्वारा झारखंड और छत्तीसगढ़ में लगाए गए आईईडी बम धमाकों में मौत हो गई थी।