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नक्सलियों के पैसे से हुई थी भीमा-कोरेगांव में हिंसा, पुलिस का दावा, छापेमारी में मिले सबूत

Fri, 08 Jun 2018 04:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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(फाइल फोटो)
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पुणे के भीमा-कोरेगांव हिंसा में नक्सलियों के पैसे का इस्तेमाल किया गया था। छापेमारी में जब्त किए गए कागजात इसके सबूत हैं। इसी सबूत के आधार पर पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बृहस्पतिवार को पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त रवींद्र कदम ने यह जानकारी दी। संयुक्त पुलिस आयुक्त कदम ने कहा कि 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में हुई जातीय हिंसा एलगार परिषद के प्रमुख आयोजक सुधीर ढवले सहित गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों के नक्सलियों से संबंध हैं। लेकिन, इस कार्यक्रम में शामिल हुए अन्य 250 संगठनों का नक्सलियों से कोई संबंध सामने नहीं आया है। 
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पुणे पुलिस ने बुधवार को मुंबई के गोवंडी इलाके से सुधीर ढवले, नागपुर से वकील सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत और प्रो. सोमा सेन के अलावा दिल्ली से रोना विल्सन को गिरफ्तार किया था। कदम ने कहा कि रोना विल्सन के दिल्ली स्थित उनके फ्लैट से पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। विल्सन के कंप्यूटर में पुलिस को एक पत्र मिला है जिसे फरार नक्सली नेता मिलिंद तलतुंबडे ने लिखा है। यह पत्र जनवरी महीने में भेजा गया था। इस पत्र में कांग्रेस के कुछ नेताओं और भारतरत्न डॉ.भीमराव अंबेडकर के नाती भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर के नाम का उल्लेख है।

क्या है मामला

पिछले साल 31 दिसंबर को पुणे के शनिवार वाड़ा में ब्रिटिश सेना और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच हुए ऐतिहासिक युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर एलगार परिषद आयोजित किया गया था। इस दिन दलित नेता ब्रिटिश फौज की जीत का जश्न मनाते हैं। उनका मानना है कि ब्रिटिश फौज में महार टुकड़ी ने यह जीत दर्ज की थी। इस परिषद के बाद झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। उसके बाद पूरा महाराष्ट्र जातीय हिंसा की चपेट में आ गया था।  
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