पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सुप्रीम कोर्ट में माना है कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक कंपनी में काम करने के लिए परमिट हासिल किया था। अपने खिलाफ मनी लांड्रिंग से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान नवाज ने यह बात कही। हालांकि उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने यूएई में काम करने की बात छिपाई।
अपने वकीलों ख्वाजा हैरिस, अमजद परवेज और साद हाशमी के मार्फत शनिवार को पाक की सर्वोच्च अदालत में दाखिल किए गए लिखित उत्तर में शरीफ ने कहा कि उन्होंने कैपिटल एफजेडई के लिए काम किया और इसके लिए वर्क परमिट हासिल करने की जानकारी उन्होंने 2013 के आम चुनाव के दौरान अपने नामांकन पत्र में दी थी।
शीर्ष अदालत द्वारा गठित एक संयुक्त जांच दल (जेआईटी) 1990 में शरीफ परिवार के विदेशी बिजनेस डीलिंग की जांच कर रहा है। जेआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री शरीफ कैपिटल एफजेडई के तत्कालीन चेयरमैन थे और उन्होंने इसके लिए यूएई की सरकार से वर्क परमिट भी हासिल किया था।
प्रधानमंत्री के वकीलों ने शुरुआती तौर पर इन आरोपों से इनकार किया है कि वह किसी विदेशी कंपनी के चेयरमैन थे। अपने एक ताजा जवाब में शरीफ ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके बेटे हसन नवाज कैपिटल एफजेडई के मालिक, निदेशक एवं सचिव और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे।
नवाज इस कंपनी में न तो शेयरहोल्डर हैं और न ही निदेशक या सचिव। प्रधानमंत्री 2007 में कंपनी के औपचारिक कार्यालय धारक थे। तब वह निर्वासित जीवन बिता रहे थे। उनका इस कंपनी के संचालन और रोजमर्रा के मामलों की निगरानी में कोई दखल नहीं था।