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'अब ढूंढने के लिए तस्वीर की जरूरत नहीं पड़ेगी': नोबेल शांति पुरस्कार पर बोले नवी पिल्लई के परिजन, और क्या कहा?

Wed, 14 Oct 2026 04:37 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, मदुरै

सार

नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की खबर से तमिलनाडु के बटलगुंडु गांव में उनके रिश्तेदारों ने खुशी मनाई। करीब दो दशक पहले वह अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए पुश्तैनी गांव पहुंची थीं। पिता ने उन्हें एक पुरानी तस्वीर और अधूरा पता दिया था, जिसके सहारे परिवार की तलाश शुरू हुई।
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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नवी पिल्लई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/un.org
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विस्तार
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एक पुरानी तस्वीर और पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के संकल्प ने संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख नवनीतम 'नवी' पिल्लई को करीब दो दशक पहले तमिलनाडु में उनके पुश्तैनी गांव से दोबारा जोड़ दिया था। अब 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर उनके पैतृक गांव बटलागुंडु में परिवार के लोग खुशी मना रहे हैं और उनके भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
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नॉर्वे की नोबेल समिति ने पिल्लई को 2026 का शांति पुरस्कार देने की घोषणा करते हुए कहा कि युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में मुकदमा चलाए जाने को सुनिश्चित करने में उनकी अहम भूमिका रही है। पिल्लई का अपने पुश्तैनी गांव से भावनात्मक जुड़ाव 1970 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने पहली बार वहां का दौरा किया था। वर्ष 2007 में वह अपने दिवंगत पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए फिर गांव पहुंचीं। 

पिता की अस्थियां विसर्जित करने आई थीं भारत
पिल्लई के करीबी रिश्तेदार एम वेंकटेश कुमार ने बताया कि उनके पिता का 2007 में दक्षिण अफ्रीका में निधन हो गया था। मृत्यु से पहले उन्होंने अपनी अस्थियों को रामेश्वरम में विसर्जित करने और परिवार के पुश्तैनी देवता के मंदिर में दर्शन करने की इच्छा जताई थी।
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वेंकटेश कुमार के मुताबिक, पिल्लई के पिता ने उन्हें एक तस्वीर और अधूरा-सा पता दिया था, ताकि वह अपने रिश्तेदारों को खोज सकें। उन्होंने बताया, ''वह कुछ अधिकारियों के साथ डिंडीगुल पहुंचीं और हमें तलाशने के लिए करीब दस दिन तक एक यात्री निवास में रुकी रहीं।''

चाय की दुकान पर मिली रिश्तों की कड़ी
परिजनों की तलाश में एक स्थानीय चाय की दुकान पर अचानक अहम सुराग मिला। वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने तस्वीर में पिल्लई के दादा को पहचान लिया। इसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर, राजस्व अधिकारियों और स्थानीय लोगों की मदद से वह व्यक्ति पिल्लई को उनके पुश्तैनी घर तक ले गया। वहां उनकी मुलाकात वेंकटेश कुमार और उनके परिवार से हुई।

वेंकटेश कुमार ने बताया, "यह जानकर वह बहुत खुश हुईं कि यहां उनका परिवार है। उन्होंने और उनके अधिकारियों ने इस जगह के बारे में सारी जानकारी ली, इसे हमारा पुश्तैनी घर बताया और तस्वीरें खींचीं। उन्होंने हमसे कहा था कि जब भी आपके पास समय हो, हमें खबर भेजिए। आपको किसी भी तरह की मदद की जरूरत होगी, तो हम सहायता करेंगे।"

क्या भारत आएंगी नवनीतम पिल्लई?
नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की खबर से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और शांति के लिए पिल्लई के लंबे योगदान को मिली इस पहचान पर सोमवार को वेंकटेश कुमार और उनके परिवार ने केक काटकर जश्न मनाया। 

वेंकटेश कुमार ने खुशी जताते हुए कहा, "वह सिर्फ एक मशहूर न्यायविद नहीं हैं, बल्कि मेरी बुआ हैं और हमारा खून का रिश्ता है।" उन्होंने कहा कि पूरे गांव को इस उपलब्धि पर गर्व है। उन्होंने कहा, "हम भारत आने पर उन्हें आमंत्रित करने की योजना बना रहे हैं। यह हमारे गांव के लिए सम्मान की बात है। इस बार हमें उन्हें ढूंढने के लिए किसी तस्वीर की जरूरत नहीं पड़ेगी।"

रंगभेद के दौर में पली-बढ़ीं, मानवाधिकारों की पैरवी की
नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में तमिल मूल के भारतीय माता-पिता के घर हुआ था। वह रंगभेद के दौर में पली-बढ़ीं। आगे चलकर उन्होंने नस्लीय भेदभाव को चुनौती देने, रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करने और मानवाधिकारों तथा समानता को बढ़ावा देने के लिए काम किया।

शांति पुरस्कार की घोषणा के कुछ घंटे बाद पिल्लई ने कहा, "नैतिक रूप से आपकी दूसरी जो भी जिम्मेदारियां हों, मानवाधिकारों की रक्षा करना और युद्ध से दूर रहना आपकी कानूनी जिम्मेदारी है।" उन्होंने यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय अपराधों से बचे लोगों और अंतरराष्ट्रीय न्याय की रक्षा करने वालों को समर्पित किया। पिल्लई ने कहा कि उनका "करुणा और साहस यह सुनिश्चित करता रहता है कि अपराध करने वालों को दंड से बचकर राज करने की अनुमति नहीं मिलेगी।"

पिल्लई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चल रहे एक मामले में न्यायाधीश के रूप में भी काम कर रही हैं। इस मामले में गाम्बिया ने म्यांमार पर नरसंहार संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
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