अगर कोई फूड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां अपने फूड प्रोडक्ट्स पर ‘नेचुरल’, ‘फ्रेश’, ‘ऑरिजनल’, ‘ट्रेडिशऩल’, ‘प्रीमियम’,‘ऑथेंटिक’, ‘जेनुइन’ और ‘रियल’ जैसे शब्द लिख कर ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करती हैं। अब एफएसएसएआई ऐसी कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी कर रहा है। एफएसएसएआई के मुताबिक ऐसे गुमराह करने वालों विज्ञापनों पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की तरफ से जारी नए नियमों के मुताबिक कोई भी फूड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी अपने उत्पाद बेचने के लिए इस तरह के फूड लेबल्स का प्रयोग नहीं कर सकती। एफएसएसएआई का कहना है कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही इस तरह के फूड लेबल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ फूड ऑपरेटर्स अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए एनर्जी, फैट, कोलेस्ट्रोल, सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट, शुगर, लो सोडियम साल्ट और हाई-लो फाइबर, प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स जैसे लेबल प्रयोग करते हैं।
एफएसएसएआई की तरफ से जारी नए नियमों के मुताबिक ब्रांड नेम, ट्रेड मार्क या फैंसी नामों में इस तरह के विशेषणों को उपयोग प्रोडक्ट के लेबल, प्रेजेंटेशन या एडवरटाइजिंग में किया जाता है, तो यह ग्राहकों को गुमराह करने जैसा होगा। ऐसे मामलों में कंपनियों को प्रोडक्ट में उचित जगह पर कम से कम 3 मिलीमीटर का खंडन ‘यह केवल ब्रांड नेम या ट्रेडमार्क है और यह उत्पाद की प्रकृति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है’ लिखना पड़ेगा।
एफएसएसएआई के मुताबिक कोई भी व्यक्ति, एडवरटाइजिंग कंपनी इस तरह के गुमराह करने वाले विज्ञापन जारी करती है, तो खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 53 के तहत 10 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। एफएसएसएआई का कहना है कि नए नियम को आधिकारिक गजट में जल्द ही शामिल किया जाएगा और 01 जुलाई, 2019 से सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को इसे मानना होगा।
एफएसएसएआई का कहना है कि नए नियमों के मुताबिक केवल वहीं कंपनियां इस तरह के दावे प्रयोग कर सकती हैं, जिनके उत्पाद किसी भी तरह से प्रसंस्कृत (प्रोसेस) नहीं होंगे। केवल उन्हें धोया, छीला, ठंडा या काटा गया हो और उनकी मूल प्रकृति के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई हो। नए नियमों में दावों और विज्ञापन जारी करने के सिद्धांत, पोषण तत्वों के दावों के लिए मानदंड, शुगर और सोडियम साल्ट और हेल्थ रिस्क जैसे मानदंडों को शामिल किया गया है।