केरल विधानसभा में मंगलवार को नेटिविटी कार्ड बिल 2026 पारित कर दिया गया। विपक्ष के विरोध और बहिष्कार के बीच वाम सरकार ने सदन की शेष विधायी और वित्तीय कार्यवाही को तेजी से निपटाया। सरकार ने इस कानून को केरलवासियों की पहचान और अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं कांग्रेस नीत यूडीएफ की गैरमौजूदगी में बिना चर्चा के कई महत्वपूर्ण विधेयक पास किए गए।
स्पीकर ए एन शमसीर ने कहा कि सदन का कामकाज तय कार्यक्रम के अनुसार चलाना संभव नहीं था। इसलिए सभी दलों से चर्चा के बाद आने वाले दिनों के लिए निर्धारित अनुदान मांगों को एक ही दिन में लिया गया। कांग्रेस नीत यूडीएफ ने सबरीमाला सोना प्रकरण को लेकर कार्यवाही का बहिष्कार किया था। उनकी अनुपस्थिति में विभिन्न विभागों की अनुदान मांगें बिना चर्चा के पारित कर दी गईं।
नेटिविटी कार्ड बिल क्या है?
नेटिविटी कार्ड बिल 2026 का उद्देश्य राज्य के लोगों को स्थायी और फोटोयुक्त पहचान देना है। सरकार का कहना है कि इससे किसी भी व्यक्ति को अपनी पहचान और निवास साबित करने में कठिनाई नहीं होगी। राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले वर्ष दिसंबर में इस योजना को सिद्धांत रूप में मंजूरी दी थी। पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसे अंतिम स्वीकृति मिली।
विधानसभा में नेटिविटी कार्ड बिल क्यों पारित किया गया
- पहचान और निवास का प्रमाण आसान बनाना... सरकार का कहना है कि कई लोगों को बार-बार यह साबित करना पड़ता है कि वे केरल के मूल निवासी हैं। इस बिल के जरिए फोटोयुक्त स्थायी नेटिविटी कार्ड दिया जाएगा, ताकि पहचान साबित करने में परेशानी न हो।
- कानूनी वैधता देना... दिसंबर में घोषित योजना को कानून का दर्जा देने के लिए यह विधेयक लाया गया। अब कार्ड को विधायी समर्थन मिल गया है।
- मूल निवासियों की पहचान सुरक्षित करना... सरकार का दावा है कि इससे केरल में जन्मे या केरल मूल के लोगों को आधिकारिक पहचान मिलेगी।
- राजनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि... राज्य सरकार ने इसे केंद्र द्वारा नागरिकता संशोधन कानून लागू करने की पृष्ठभूमि में उठाया गया कदम बताया। सरकार का कहना है कि यह राज्य के लोगों, खासकर अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए है।
- प्रशासनिक सुविधा... सरकार के मुताबिक इससे सरकारी योजनाओं, दस्तावेजों और अन्य प्रक्रियाओं में मूल निवासी की पुष्टि आसान होगी।
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कानून की मुख्य विशेषताएं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्ड मौजूदा नेटिविटी सर्टिफिकेट की तर्ज पर जारी किया जाएगा। जो लोग केरल में जन्मे हैं या जिनके कम से कम एक पूर्वज का जन्म केरल में हुआ है, उन्हें यह कार्ड मिल सकेगा। शर्त यह है कि संबंधित व्यक्ति ने किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण न की हो। राज्य के बाहर जन्मे ऐसे लोग, जिनके माता-पिता नौकरी के कारण बाहर रहे हों, उन्हें भी केरल का मूल निवासी माना जाएगा।
केंद्र के कानून की पृष्ठभूमि
राज्य के राजस्व मंत्री के राजन ने बिल पेश करते समय कहा कि यह कदम केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून लागू करने की पृष्ठभूमि में लाया गया है। वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि यह कानून अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कांग्रेस नीत यूडीएफ ईमानदार होती तो सदन में उपस्थित रहती। भाजपा ने इस पहल की आलोचना करते हुए इसे खतरनाक अलगाववादी राजनीति करार दिया।
अन्य विधेयक भी बिना चर्चा के पास
नेटिविटी कार्ड बिल के साथ ही आबकारी संशोधन विधेयक 2026, केरल एडवोकेट्स क्लर्क्स वेलफेयर फंड संशोधन विधेयक 2026 और केरल एडवोकेट्स वेलफेयर फंड संशोधन विधेयक 2026 भी पारित किए गए। जिन विधेयकों की विषय समिति रिपोर्ट पेश होनी थी, उन्हें भी विचार के लिए लिया गया और कुछ संशोधन स्वीकार कर बिना बहस के पारित कर दिया गया। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक सुचारुता के लिए जरूरी था।
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