मणिपुर के मुख्यमंत्री युम्नाम खेमचंद सिंह ने कहा है कि सरकार 36 समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक समिति बनाएगी। यह समिति संघर्षग्रस्त क्षेत्र में शांति, सद्भाव और समावेशी विकास को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सवाल के बाद आया है। खेमचंद सिंह इंफाल में पहाड़ी मुखियाओं के सम्मान समारोह में बोल रहे थे। यह समारोह मेरा हाउ चोंगबा महोत्सव 2026 के तहत पहाड़ी मुखिया अतिथि गृह के उद्घाटन के बाद हुआ। शनिवार को मुख्यमंत्री ने मणिपुर की रक्षा में सभी समुदायों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने त्योहार से शांति और भाईचारे की भावना मजबूत होने की उम्मीद जताई। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी पर खुशी व्यक्त की। यह पहाड़ियों और घाटी के बीच भाईचारे का प्रतीक है।
गुजरात सरकार ने दिवाली पत्रिका से हटाई कविता
गुजरात सरकार ने अपनी वार्षिक दिवाली पत्रिका के ऑनलाइन संस्करण से एक कविता हटा दी है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने आरोप लगाया था कि इस कविता में भगवान राम और पूजनीय भक्ति संत मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक संदर्भ हैं।
कवि अजीज टंकारवी की इस कविता को ऑनलाइन संस्करण से हटा दिया गया है। इसकी जगह कवि प्रकाश 'जलाल' की 'जोइये' शीर्षक वाली कविता शामिल की गई है। यह पत्रिका 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' है। इसे राज्य का सूचना एवं प्रसारण विभाग हर साल दिवाली के दौरान प्रकाशित करता है।
गुजरात वीएचपी के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूत ने पुष्टि की कि टंकारवी की कविता को बदल दिया गया है। राजपूत ने कहा, हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने हमारी मांग पर तुरंत कार्रवाई की और दिवाली पत्रिका से उस विवादित कविता को हटा दिया।
वीएचपी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर क्या मांग की थी?
यह घटनाक्रम वीएचपी की ओर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखने के बाद सामने आया है। संगठन ने 23 अक्तूबर को यह पत्र लिखा था। इसमें कविता को तुरंत हटाने की मांग की गई थी। साथ ही, कविता के लेखक और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की गई थी।
पत्र में वीएचपी के अहमदाबाद क्षेत्र के सचिव अश्विन पटेल ने इस साल की वार्षिक पत्रिका के पृष्ठ 389 पर प्रकाशित कविता पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इसमें भगवान राम और मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक संदर्भ हैं। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
तमिलनाडु सरकार पर तमिलिसाई सुंदरराजन का हमला
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने रविवार को तमिलनाडु सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को रूट मार्च निकालने की अनुमति के लिए अदालत का रुख करने पर मजबूर किया। उन्होंने आरएसएस को अनुशासित 'सेवा' संगठन बताया।
उनकी यह टिप्पणी रविवार को एग्मोर में आयोजित आरएसएस के रूट मार्च के दौरान आई। यह मार्च संगठन के शताब्दी समारोह के मौके पर राज्यभर में आयोजिक रूट मार्च का हिस्सा था। हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट ने आरएसएस को 128 स्थानों पर रूट मार्च निकालने की अनुमति दी थी। इसके बाद तमिलनाडु में अलग-अलग जगहों पर ये मार्च निकाले गए।
एग्मोर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए सुंदरराजन ने मौजूदा और पिछली, दोनों राज्य सरकारों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकारों ने खुद से मार्च निकालने की अनुमति देने में अनिच्छा दिखाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नशे के आदी लोग और अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिल्कुल नहीं है। इसके बावजूद सरकार शांतिपूर्ण मार्च की अनुमति देने से इनकार करने के लिए कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देती है।
भाजपा नेता ने कुछ राजनेताओं पर भी निशाना साधा। इनमें वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन और माकपा नेता षणमुगम शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता लगातार आरएसएस की नकारात्मक छवि पेश करते रहे हैं।
यूट्यूबर अमृत सिंह डैरेन पर सांप्रदायिक टिप्पणी मामले में केस
यूट्यूबर अमृत सिंह डैरेन के खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। डैरेन ने इंस्टाग्राम वीडियो में दावा किया था कि फोर्ट कोच्चि के काशि आर्ट कैफे में मुहम्मद अली जिन्ना की मूर्ति लगी है और वहां बीफ परोसा जाता है। फोर्ट कोच्चि पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) और 192 के तहत दर्ज किया है। एफआईआर में कहा गया है कि आरोपी के कार्यों से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है और धार्मिक समुदायों में नफरत फैल सकती है। इस वीडियो को लेकर समाज में व्यापक आलोचना हुई। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन और विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने भी इसकी कड़ी निंदा की। सतीशन ने कहा कि केरल में सांप्रदायिक घृणा के लिए कोई जगह नहीं है, जबकि विजयन ने कानूनी कार्रवाई की मांग की।