कोलकाता के राजकीय एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शौचालय में एक नर्स मृत पाई गई, जिससे सनसनी फैल गई। वह बुधवार रात अस्पताल की विशेष निगरानी इकाई में ड्यूटी पर थी। मृतका की पहचान रूपाली दास (30) के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए एक अलग टीम बनाई है।
शुरुआती जांच से पता चला है कि वह रात करीब 8 बजे ड्यूटी पर आई थी। रात करीब 10.30 बजे स्त्री रोग विभाग भवन में एंटीनेटल वार्ड के पास बने स्टाफ वॉशरूम में गई थी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, जब वह कुछ देर तक वापस नहीं लौटी तो उसके साथी उसे देखने गए और पाया कि वॉशरूम का दरवाजा बंद था। कई बार खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिलने पर, उनमें से दो लोगों ने दरवाजा तोड़ा और उसे फर्श पर बेहोश पड़ा पाया। उन्होंने बताया कि नर्स की जांच के लिए एक डॉक्टर को बुलाया गया और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
ओडिशा में भ्रष्टाचारी सरकारी डॉक्टर नपे
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार (12 अगस्त, 2026) को एक डॉक्टर को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, गुरुंडिया सीएचसी, सुंदरगढ़ के पूर्व चिकित्सा अधिकारी पतितपाबन बारिक को भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी पाया गए था। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति जानी जीरो टॉलरेंस का संकल्प दोहराते हुए ऐसे अन्य मामलों में सख्ती से पेश आने के निर्देश दिए हैं।
दुष्कर्म के आरोपी तेजपाल की बेटी बोलीं- 'पिता समान' और 'बचपन की दोस्त' जैसे दावे गलत
पूर्व पत्रकार तरुण तेजपाल की बेटी कारा ने अपने पिता पर लगे दुष्कर्म मामले की शिकायतकर्ता को 'बचपन की दोस्त' और 'पिता समान' मानने के दावे को 'पूर्ण असत्य' बताया है। उन्होंने बुधवार को एक बयान में कहा कि यह बात गलत है कि वे करीबी दोस्त या पारिवारिक मित्र थे। कारा ने दावा किया कि शिकायतकर्ता उनसे और उनकी बड़ी बहन से भी बड़ी है। कारा ने कहा कि उन्हें वयस्क होने तक शिकायतकर्ता के अस्तित्व के बारे में पता नहीं था। 'पिता समान' वाली बात की जांच म्हापसा की सेशंस कोर्ट में सुनवाई के दौरान की गई थी। Tehelka पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तेजपाल को नवंबर 2013 में गोवा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी एक जूनियर पत्रकार द्वारा गोवा के एक लग्जरी होटल में यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद हुई थी। यह घटना पत्रिका के वार्षिक ThinkFest कार्यक्रम के दौरान हुई थी। 2021 में सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा।
हाई कोर्ट का फैसला क्या, आगे की चुनौती कैसे?
राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच में इस फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। तेजपाल ने इस आदेश को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।