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कवायद: छात्रों को आत्महत्या से बचाने के लिए राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन, सभी मेडिकल कॉलेज सर्वे में लेंगे भाग

Sun, 28 Apr 2024 05:03 AM IST
निर्मल कांत परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।

सार

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच साल में देश में 122 छात्रों ने पढ़ाई के दौरान आत्महत्या कर ली। इनमें 64 एमबीबीएस और 58 छात्र स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में थे। इसी अवधि यानी 2018 से 2022 के बीच में 1270 चिकित्सा छात्रों ने अलग अलग कारणों के चलते बीच समय में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी है।
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आत्महत्या (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चिकित्सा छात्रों को आत्महत्या और अवसाद से बचाने के लिए देश में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कराया जाएगा। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि एंटी-रैगिंग समिति के जरिये एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के साथ साथ प्रोफेसर का ऑनलाइन सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया है।

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एनएमसी के मुताबिक हाल के दिनों में मेडिकल छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य चिंता का कारण बना है। इसके समाधान के लिए टास्क फोर्स ने एक एक गूगल फॉर्म तैयार किया है जिसके जरिए आगामी तीन मई तक छात्रों और सभी विभागों में कार्यरत प्रोफेसर से प्रतिक्रियाएं मांगी गई हैं।

बेहतर डॉक्टर उपलब्ध कराने में मिलेगी मदद
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अविरल माथुर ने कहा कि देश को बेहतर डॉक्टर उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम सराहनीय है। इससे काफी मदद मिलेगी।
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नाम रखा जाएगा गोपनीय
एनएमसी में एथिक्स एवं मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड के सदस्य और प्रवक्ता डॉ. योगेंद्र मलिक ने बताया कि चिकित्सा छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए देश में पहली बार एक नए विकल्प को चुना गया है। उन्होंने बताया कि सर्वे में शामिल छात्रों और प्रोफेसर की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा। इसे किसी भी सदस्य या कॉलेज प्रशासन के साथ साझा नहीं किया जाएगा। इसका उपयोग टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट में केवल विश्लेषण और सिफारिशों के उद्देश्य से करेगी।

पांच साल में 122 छात्रों ने दी जान
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच साल में देश में 122 छात्रों ने पढ़ाई के दौरान आत्महत्या कर ली। इनमें 64 एमबीबीएस और 58 छात्र स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में थे। इसी अवधि यानी 2018 से 2022 के बीच में 1270 चिकित्सा छात्रों ने अलग अलग कारणों के चलते बीच समय में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी है। पढ़ाई छोड़ने वालों में 153 एमबीबीएस और 1117 स्नातकोत्तर के छात्र थे।

वरिष्ठों का शोषण भी बड़ी वजह
डॉ. माथुर ने यह भी कहा कि मानसिक तनाव के पीछे कई कारण हैं जिनमें लगातार 36 घंटे की ड्यूटी, अपर्याप्त आराम, वरिष्ठों के जरिये शोषण, प्रतिकूल कार्य वातावरण, समय की कमी और बर्नआउट जैसे कई कारण हैं जिनकी वजह से छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

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